बुधवार, 1 अप्रैल 2026

जारी है युद्ध

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जन्मे 

कुबुद्धि बालक  

अब तक तो वयोवृद्ध हो चुके हैं

हिंसक उन्माद में डूबकर

मानसिक संतुलन खो चुके हैं  

अमेरिका और इज़राइल 

मिलकर लड़ रहे हैं युद्ध 

अकेले ईरान से

महीना भर भी कम लग रहा है इन्हें 

लड़ते-लड़ते भीषण युद्ध 

मारे जा रहे हैं मासूम बच्चे 

जिनका कोई अपराध नहीं 

मारे जा रहे हैं लोग 

जिनके पास बचाव के लिये कोई हथियार नहीं 

मारे जा रहे हैं लगातार 

निरपराध परिंदे और सुकोमल तितलियाँ 

जो अनभिज्ञ हैं विकृत मानवीय सोच से 

क्या दोष है पर्यावरण का 

जो डूब गया है 

बिषैले बारूद के गर्द-ओ-ग़ुबार में 

सामूहिक मृत्यु को सहज बनाते 

विवेकहीन नेताओं के आदेश

भरा है जिनमें तकनीकी आवेश  

अपने लिये सुखद मृत्यु की कल्पना में डूबे हैं 

धिक्कार है ऐसे संवेदनाविहीन दिमाग़ों पर!

जागो शांति के मसीहाओ!

वक़्त रहते पृथ्वी को वीरान होने से बचा लो!

और कोई कुबुद्धि ऐसी क्षमता में न हो 

जो ले जाए दुनिया को 

परमाणु-युद्ध की ओर 

विवेकशील मस्तिष्क को ही सौंपना 

अब देश की बाग-डोर!    

 © रवीन्द्र सिंह यादव  


2 टिप्‍पणियां:

  1. जाने कब तक होता रहेगा युद्ध....।
    इंसानियत के लिए एक संवेदनशील क़लम का आह्वान महज एक रचना तक सीमित नहीं एक बौद्धिक जिम्मेदारी है। युद्ध किसी भी देश के नागरिकों के त्रासदी और राजनीतिज्ञों के लिए महत्वाकांक्षा की पूर्ति का साधन होता है जिसके भयावह परिणाम आने वाली अनेक पीढ़ियॉं भुगतती है।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ३ अप्रैल २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. युद्ध की विभीषिका से जन्मी मार्मिक रचना

    जवाब देंहटाएं

आपकी टिप्पणी का स्वागत है.

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