माँ तो केवल माँ होती
ईश्वर का साक्षात रूप है माँ
जो हर हाल में साथ होती है
माँ की मुस्कुराहट क्या होती है
देखा एक चैनल पर
महानगर से गांव की ओर
पैदल जाती एक्सप्रेस-वे पर
दोनों कंधों पर लादे बच्चे
हाथों में बचा-खुचा सामान
थकान से चूर पैरों में छाले
फिर भी कैमरे के समक्ष
ऐसी मुस्कुराहट
जो माँ होने का गर्वीला एहसास
हमारे दिलों में उतार देती है
यह क्लिप लॉकडाउन की बिडंबना का
अविस्मरणीय चित्र उतार देती है
माँ है विशाल वट-वृक्ष की
छाई छतनारी छांव
रचती रहती है
स्पंदन-अनुभूति का
नया-नबेला गुणात्मक गांव
माँ की गोद में समाया है लोक
संतति के जीवन में बिखेरती है आलोक
माँ थमा देती है तूलिका
ख़ुद बन जाती है कैनवास
उम्रभर गूँजती रहती है
माँ की झिड़की-प्रशंसाभरी बोली
एक सुखद एहसास
अब बहुत याद आता है
माँ की लोरी का वह स्वर
जब नींद आने तक
सुनाती थी रात के पहर
मेरे साथ एक दिन
वह स्वर भी लुप्त हो जाएगा
जो बस मेरे मस्तिष्क में रिकॉर्ड है!
© रवीन्द्र सिंह यादव
ईश्वर का साक्षात रूप है माँ
जो हर हाल में साथ होती है
माँ की मुस्कुराहट क्या होती है
देखा एक चैनल पर
महानगर से गांव की ओर
पैदल जाती एक्सप्रेस-वे पर
दोनों कंधों पर लादे बच्चे
हाथों में बचा-खुचा सामान
थकान से चूर पैरों में छाले
फिर भी कैमरे के समक्ष
ऐसी मुस्कुराहट
जो माँ होने का गर्वीला एहसास
हमारे दिलों में उतार देती है
यह क्लिप लॉकडाउन की बिडंबना का
अविस्मरणीय चित्र उतार देती है
माँ है विशाल वट-वृक्ष की
छाई छतनारी छांव
रचती रहती है
स्पंदन-अनुभूति का
नया-नबेला गुणात्मक गांव
माँ की गोद में समाया है लोक
संतति के जीवन में बिखेरती है आलोक
माँ थमा देती है तूलिका
ख़ुद बन जाती है कैनवास
उम्रभर गूँजती रहती है
माँ की झिड़की-प्रशंसाभरी बोली
एक सुखद एहसास
अब बहुत याद आता है
माँ की लोरी का वह स्वर
जब नींद आने तक
सुनाती थी रात के पहर
मेरे साथ एक दिन
वह स्वर भी लुप्त हो जाएगा
जो बस मेरे मस्तिष्क में रिकॉर्ड है!
© रवीन्द्र सिंह यादव