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सोमवार, 7 जनवरी 2019

चुनावी दौर


मदारी

एक बार फिर

व्यस्त हैं सजाने में

अपना-अपना पिटारा

कोई सजा रहा है

भव्य भड़काऊ रथ

कोई झाड़ रहा है

अपनी गाड़ी ज़ंग खायी खटारा


पैने हो रहे हैं

सवालों के तीखे तीर

कोई दोहरायेगा

रटे जवाबों की 

घिसी-पिटी लकीर

होगा कोई सॉफ्ट...

कोई एकदम हार्ड...

खेलेगा अभिनय करते

कोई विक्टिम कार्ड


दाल में हो कुछ काला

आस्तीन में साँप काला

है कोई पाला बदलने वाला

या फिर हो घोटाला गड़बड़झाला

कहीं डूबेगी नैया

कहीं खुलेगा क़िस्मत का ताला


अपराधियों-आरोपियों-लम्पटों का

लफ़्फ़ाज़ीमय रंगारंग शो

देख-देख ख़ुद को कोसेगी जनता

कॉरपोरेट-पार्टी-मीडिया

गठजोड़ को अब कौन नहीं जानता


बेरोज़गारों को मिलता 

भरपूर मौसमी काम

नयी सरकार देती जनता को

तोहफ़ा बढ़ाकर चीज़ों के दाम  


चुनावी हिंसा में

कुछ घरों के 

चराग़ बुझाते हुए

गुज़र जायेगा

एक और चुनावी दौर

हम तलाशते रहेंगे

पुनः अपने-अपने

पाँवों के नीचे ठौर।

© रवीन्द्र सिंह यादव


ज़ंग = RUST

बुधवार, 28 नवंबर 2018

गोल्डन टॉयलेट


समाचार आया है -
"माल्या से छिनने वाला है गोल्डन टॉयलेट!"
संभवतः 
माल्या का 
मल-मूत्र महकता होगा 
अतः सोने की 
टॉयलेट सीट का ख़्याल 
मन में खटकता होगा 
19 नवम्बर को 
मनाया जाता है 
विश्व शौचालय दिवस 
सुनने को ऐसे समाचार 
आज हम हैं विवश 
मल में हो सकते हैं-
WBC, 
RBC, 
CYST,
OVA,
कृमि, बैक्टीरिया और फंजाई
इस ठग व्यवसायी को 
कौन समझाये भाई 
लंदन में एक लेखक ने 
कर दिया असहज खुलासा 
विलासता में डूबे 
शातिर शख़्स को 
कैसे मिले दिलासा  
देश से ले भागा रोकड़ा 
करके महा फ्रॉड 
विदेश में भी दिखलायी कला 
लेकिन घिर गया 
लगा न पाया दौड़ 
 क़लम घिसने वाले 
सदियों रहे गुमनाम 
गोल्डन सीट वाले 
टॉयलेट के मालिक 
चर्चा में दिलचस्पी से 
हो जाते हैं बदनाम 
हमारी जीवन शैली में 
सोने से जुड़ी है 
श्रेष्ठता की भावना
सोने की करते हैं 
लोग कामना 
सोने को आदर इतना 
भारत में महिलाऐं 
नहीं पहनती हैं 
सोने के बिछुआ 
यह समाचार पढ़कर 
आपको आश्चर्य हुआ?
© रवीन्द्र सिंह यादव 

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

जंगल में आग



जंगल की राजधानी  में


अचानक 

शरद ऋतु में 

गर्मी बढ़ी

हुई हवा से 

नज़ाकत नमी नदारत 

साँसों में बढ़ती ख़ुश्की 

बहुत हलकान ज़िन्दगी 

झरे पीले पत्ते पेड़ों से 

घाम में घिसटती घास 

तपन से मुरझा गयी

गर्म हवा ने रुख़ किया 

अपने आसमान का 

दबाव क्षेत्र निर्मित हुआ 

ठंडी हवा गर्म हवा का 

ख़ाली स्थान भरने 

प्रचंड वेग से बही 

सुदूर से आती हवा 

तीव्र तूफ़ान बनी 

विशाल वरिष्ठ वृद्ध वृक्षों की 

वक्र शुष्क टहनियाँ 

बाँस के गगनचुम्बी झुरमुट 

रगड़ने लगे आपस में 

चिंगारियाँ लम्बी हुईं 

उड़ने लगे पलीते 

दहकने लगे शोले 

सूखी घास सहायक हुई

जंगल में फैल गयीं 

आक्रामक आग की लपटें 

छा गया धुआँ ही धुआँ हर सू 

मासूम वन्य जीव 

जलकर टोस्ट बन गये 

जंगल का राजा सोता रहा 

सुरक्षित महल-सी माँद में 

पर्याप्त भोज्य भंडार के साथ 

अधजले घायल प्राणी

निकाल रहे थे भड़ास 

अपने निकम्मे गुप्तचर तंत्र पर 

माँद में भरा धुआँ 

बढ़ी असहनीय तपिश 

तब खाँसते हुए 

वनराज बाहर आया 

कराहते प्राणियों की पीड़ा देख 

मन ही मन ख़ुश हुआ 

अगले पल भावी भोजन की

गहन चिंता में मग्न हुआ 

जंगली मीडिया फूला समाया 

देखकर अपने पापों के सबूत

जलकर राख होने की 

प्रबल सम्भावना पर 

सुलगते भयावह जंगल को देख 

सजग सक्रिय बुद्धिजीवियों ने 

चिंतन बैठक आयोजित की 

सरकार से हवाई बौछार का 

विनम्र आग्रह किया 

पर्यावरणप्रेमी आगे आये 

हरियाली के झंडे बैनर लिये।
  

 © रवीन्द्र सिंह यादव

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