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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

यह तो समय तय करेगा

तुम फ़रिश्ता हो 

या शैतान 

तुम्हारे कर्म तय करेंगे, 

तुम रहनुमा हो 

या दिग्भ्रामक 

भावी पीढ़ी के लोग तय करेंगे। 


तुमने किसी को 

ऊपर उठाया है 

या रचीं थीं साज़िशें 

किसी को गिराने की 

इंतज़ार करो  

यह तो समय तय करेगा। 


तुम इंसानीयत के साथ थे 

या हैवानीयत के 

जब इतिहास लिखा जाएगा 

तो अवश्य दर्ज किया जाएगा। 


तुम्हारी हमदर्दी 

मज़लूम के साथ थी 

या ज़ालिम के

तुम्हारी कार-गुज़ारियों के क़िस्से  

दूर-दूर तक जाकर 

हवा चीख़-चीख़कर कहेगी।  

© रवीन्द्र सिंह यादव

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