गुरुवार, 23 जुलाई 2026

युवाशक्ति

  युवा-पीढ़ी को समर्पित मेरी यह कविता सन 1998 में आकाशवाणी ग्वालियर म.प्र.से प्रसारित हुई थी. आज पुनः स्मृति में गूँज उठी-


युवा हूँ मैं

निरुत्साह से अनछुआ हूँ मैं

अक्षय ऊर्जा का भंडार हूँ मैं 

दक्षता धारण किये निडर हूँ मैं 

सभ्यता के अथाह सागर की गोद में 

अस्तित्त्व में आया हुआ द्वीप हूँ मैं 

घृणा के गान से उपजी 

प्रचंड आँधियों के बीच जलता हुआ दीप हूँ मैं 

गीदड़ों के कोलाहल में 

गूँजता हुआ सिंहनाद हूँ मैं 

घनेरे बादलों को चीरकर 

निकला हुआ शुभ्र चाँद हूँ मैं!

©रवीन्द्र सिंह यादव 


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7 टिप्‍पणियां:

  1. आभार भाई रवीन्द्र जी
    अक्षय ऊर्जा का भंडार हूँ मैं
    दक्षता धारण किये निडर हूँ मैं
    रेखांकित पंक्तिया
    सादर वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. अति सकारात्मक,सुंदर और युवा की व्यापकता को कम शब्दों में परिभाषित करती अभिव्यक्ति बहुत अच्छी लगी।
    सादर।
    --------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ जुलाई २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. अति सकारात्मक,सुंदर और युवा की व्यापकता को कम शब्दों में परिभाषित करती अभिव्यक्ति बहुत अच्छी लगी।
    सादर।
    --------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २५ जुलाई २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  4. गीदड़ों के कोलाहल में
    गूँजता हुआ सिंहनाद हूँ मैं
    सकारात्मक सोच का सिंहनाद जरूरी है

    जवाब देंहटाएं
  5. किंतु आज का युवा अपने को सिंह समझने के बजाय कुछ और ही समझना चाहता है

    जवाब देंहटाएं

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