गुरुवार, 27 अगस्त 2026

जलप्रलय

जल जीवन है 
और मृत्यु भी 
बहार है 
तो विभीषिका भी

जल किलकारी है 
और चीख़ भी 
इंसानी दंभ को 
तोड़ती सीख भी

नींव, कंगूरा, 
दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे 
बह गये सब सपने 
उम्मीदें और भरोसे 

तोड़ता सीमाएँ 
सृष्टि का विकराल रूप  
आँचल माटी का 
धरता कैसे-कैसे रूप 

अल्ट्रा मॉडर्न तकनीक 
दृश्य क़ैद करती रही 
जलप्लावन की विकरालता में 
चीख़-पुकार दबती रही 

पुनः सजेंगे सँवरेंगे 
जिजीविषा के क्षितिज 
रोपे जाते रहेंगे  
इंद्रधनुषी आशाओं भरे बीज।    
©रवीन्द्र सिंह यादव

4 टिप्‍पणियां:

  1. जल जीवन है और मृत्यु भी....
    सार युक्त रचना।
    सादर।
    -------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २८ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. प्रकृति को विकास में बांधने के नतीजे | नेपाल त्रासदी पर हताहतों को श्रद्धांजलि |

    जवाब देंहटाएं
  3. नेपाल में आयी यह भयानक त्रासदी मानव को एक चेतावनी है

    जवाब देंहटाएं
  4. कभी कभी लिखते हैं
    जान डाल देते हैं रचना में
    आभार
    सादर वंदन

    जवाब देंहटाएं

आपकी टिप्पणी का स्वागत है.

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जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...