शनिवार, 22 जुलाई 2023

मोर और साँप

 मोर तुम सुंदर हो,

मनमोहक हो,

मृदुल कंठ निराला शबाब है, 

तुम्हारा नृत्य तो लाजवाब है,

तुम साँप खाते हो... 

फिर भी ज़हरीले नहीं!

बोलो कोई जवाब है?

©रवीन्द्र सिंह यादव





#कविता

#हिंदीकविता

#प्रश्न

#हिंदी

#hindipoetry

#हिंदी_कविता

#poetry

#poetrycommunity

#poetrylovers

#poem

#सवाल

#poetryisnotdead

#भाषा

#indianpoetry

#indianpoet

#मोर

#peacock

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी टिप्पणी का स्वागत है.

विशिष्ट पोस्ट

युवाशक्ति

  युवा-पीढ़ी को समर्पित मेरी यह कविता सन 1998 में आकाशवाणी ग्वालियर म.प्र.से प्रसारित हुई थी. आज पुनः स्मृति में गूँज उठी- युवा हूँ मैं निरुत...