शनिवार, 7 जुलाई 2018

नदी के किनारे (हाइकु)

 सँकरी नदी 
थे उस पार आप  
गुफ़्तुगू आसाँ 

चलते रहे 
आ गये दूर तक
चाहा मिलन  

आ गयी आँधी
बुढ़ऊ नीम गिरा 
पुलिया बना 

ठिठक गया 
आना हुआ आपका
देखा आँखों में  

बिछड़ गये 
सदा के लिये हम 
फ़ैसला था ये। 

© रवीन्द्र सिंह यादव



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