शुक्रवार, 7 अप्रैल 2023

निरपराध

गुनगुनी अलसाई धूप में  

चील की कर्कश चीत्कार

सुन रहे हैं मासूम कान

विष वमन करते सर्पों को देख 

घर होता जा रहा है मकान  

कोमल मन पर घृणा के घाव देने 

खुल रही है दुकान-दर-दुकान

कैसे जीएगा नन्हा मेमना जीभर 

घेरे खड़ा है भेड़िया, चेहरे पर लिए कुटिल मुस्कान? 

© रवीन्द्र सिंह यादव   


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