रविवार, 14 मई 2023

देवता पत्थर होकर मूक हो गया

चित्र: महेन्द्र सिंह 

जिसे पूजा 

तब वह पत्थर था न था 

पता न था  

अगाध श्रद्धा ने 

गाढ़ दिए 

सफ़र में मील के पत्थर

दीवानगी की हद तक पूजा उसे 

एक दिन फ़ैसले की घड़ी आई 

जब उसके पुजारी ने 

अत्याचार की हदें पार कर दीं 

माँगा इंसाफ़ 

तो देवता 

पत्थर होकर 

मूक हो गया

इंसाफ़ का सवाल 

खाक़ हो गया

याचक ने ख़ुद को 

पत्थरों से घिरा पाया। 

© रवीन्द्र सिंह यादव   
      

विशिष्ट पोस्ट

नागरिक और सत्ता

सत्ता का रूप  वीभत्स हो उठता है  जब उसके हो जाते हैं  नुकीले दाँत  पैने-लंबे पंजों के नाख़ुन  आँखों से विलुप्त शील  ह्रदय में बैठ जाती है  स्...