फूल से नाराज़ होकर
तितली सो गयी है,
बंद कमरों की अब
ऐसी हालत हो गयी है।.........(1 )
हो चला सयाना फूल
ज़माने के साथ-साथ ,
मुरझाई हैं पाँखें
महक भी रो गयी है।
बंद कमरों की अब
ऐसी हालत हो गयी है।.........(2 )
नसीहत अब कोई
हलक़ से नीचे जाती नहीं,
दिल्लगी की प्यारी खनक
अब हमसे खो गयी है।
बंद कमरों की अब
ऐसी हालत हो गयी है।.........(3 )
आशियाँ दिलक़श बने
जो तेरी शोख़ियाँ हों,
ताज़ा हवा आँगन में
बीज-ए -ख़ुलूस बो गयी है।
बंद कमरों की अब
ऐसी हालत हो गयी है।.........(4 )
यादों के आग़ोश में
बैठा हुआ है बोझिल दिल,
एक मुलाक़ात मैल मन का
मनभर धो गयी है।
बंद कमरों की अब
ऐसी हालत हो गयी है।.........(5 )
@रवीन्द्र सिंह यादव