जटिलताएँ जीवन कीं
सापेक्ष आलोकित हैं
अस्तित्त्व-वेदना का
पराभवपरायण होना
अनंत और विस्तृत है
अखिल व्योम में व्याप्त हैं
अवसान की अवधारणाएँ
मधु-मालती तो खिल उठी
दुर्भावनाएँ आशंकाएँ परे रख
बेरी पर बचा है बस एक बेर
बीतते बूढ़े बसंत का
डाली झुका स्वाद चख।
©रवीन्द्र सिंह यादव
सापेक्ष आलोकित हैं
अस्तित्त्व-वेदना का
पराभवपरायण होना
अनंत और विस्तृत है
अखिल व्योम में व्याप्त हैं
अवसान की अवधारणाएँ
मधु-मालती तो खिल उठी
दुर्भावनाएँ आशंकाएँ परे रख
बेरी पर बचा है बस एक बेर
बीतते बूढ़े बसंत का
डाली झुका स्वाद चख।
©रवीन्द्र सिंह यादव