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सोमवार, 24 जुलाई 2023

दो विवाहित औरतें

 दो विवाहित औरतें

भारत के विखंडन को

आईना दिखा रही हैं,

इतिहास

इन्हें अवश्य याद रखे

यही तो कह रही हैं l

अपने-अपने देशों में

घृणा बढ़ानेवाला इतिहास

मासूम बच्चों को

पढ़ानेवालो सावधान!

सीमा हैदर की

अपने चार बच्चों सहित 

भारत में अवैध घुसपैठ पर

अंजू का वीज़ा के साथ

पाकिस्तान में प्रवेश

नहीं है अंतिम समाधान!

©रवीन्द्र सिंह यादव




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सोमवार, 24 मई 2021

गंगा में बहतीं लाशें

लाशों की दुर्दशा के 

अनचाहे मंज़र 

मुझे सोने नहीं देते 

ये लाशें मुझसे पूछतीं हैं 

गुलाबी रातों के हसीं ख़्वाब में 

कब तक सोए रहोगे?

भारत की साख़ पर 

दुनिया को क्या जवाब दोगे?

अभावों में स्वभाव 

ऐसे बदले कि

चिता का सामान न जुटा सके  

अंतिम संस्कार से 

वंचित हुए पार्थिव शरीर

कुछ बहा दिए गंगा में 

कुछ रेत में दबा दिए... 

माँसाहारी पशु-पक्षी 

लाशों को नौंचते दिखे 

वीडियो बनानेवाले 

वीभत्स कृत्य देखते रहे 

आँधी-तूफ़ान भी आकर 

उड़ाकर रही-सही सूखी रेत

रह-रहकर शव उघाड़ते रहे

करोना महामारी की

दूसरी लहर ने 

ढाया ऐसा क़हर 

छाया है मातम ही मातम 

गाँव-शहर!   

© रवीन्द्र सिंह यादव  

  

बुधवार, 27 मई 2020

उपलब्धियों का जश्न

सीमा पर चीन 

आक्रामक रुख़ के साथ 

भारत को उकसा रहा है 

शांति की आशाओं को धूमिल कर रहा 

रेलगाड़ियाँ इरादतन राह भटककर 

मज़दूरों की जबरन मौत का कारण बन रहीं हैं 

तपती सड़कों पर भूखे-प्यासे

थके-हारे पैदल चलते 

साधनहीन बच्चे-बूढ़े-जवान 

स्त्री-पुरुष श्रमिक

अपनी विवशताओं-विसंगतियों से 

भारत की सड़कों  पर 

दीनता-हीनता का 

रक्तरंजित महाकाव्य रच रहे हैं

बेरोज़गार युवाओं में 

भविष्य की आशंकाओं का 

तूफ़ान हिलोरें ले रहा है 

किसान नौकरशाही की चक्की में 

बेरहमी से पिस रहा है

अर्थ-व्यवस्था अनिश्चितता के भँवर में 

फँसकर माक़ूल निर्णय की प्रतीक्षा में 

खीझती-चीख़ती जा रही है 

भूखी-प्यासी गाय खूँटे से बँधी रँभा रही है

करोना योद्धाओं की दारुण दशा किसे भा रही है  

हानि-लाभ का गणित 

कुछ दिमाग़ों को तंग कर रहा है

कुछ में उमंग-तरंग भर रहा है 

न्याय का असहज होता जाना 

स्वाभाविक होता जा रहा है  

तब तुम उपलब्धियों का जश्न मना रहे हो...?

मुझे इसमें कतई शामिल नहीं होना है!

© रवीन्द्र सिंह यादव     

  

शुक्रवार, 15 जून 2018

फ़िटनेस चैलेंज़



पंचतत्व से बने 
भव्य 
सुसज्जित सरकारी 
एक्यूप्रेसर ट्रैक पर
प्राकृतिक वातावरण में 
देखा फ़िटनेस चैलेंज़ 
दिल्ली में 
दम घोंटती 
ज़हरीली आबोहवा का 
देखा ख़तरनाक बैलेंस 


नंगे पाँव 
ककरीली पथरीली पगडंडियों पर 
पसीने से लथपथ 
झेलतीं झुलसाती लू के थपेड़े  
मटके में मटमैला 
पानी लेकर 
मीलों वॉक करके लौटतीं  
भारत की बेटियों को 
देखा है.....  
जो अनचाहे व्यायाम के बाद 
घर आकर 
कभी भूखे पेट भी 
सो जाया करती हैं!
#रवीन्द्र सिंह यादव 

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जलप्रलय

जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...