साहित्य समाज का आईना है। भाव, विचार, दृष्टिकोण और अनुभूति का आतंरिक स्पर्श लोकदृष्टि के सर्जक हैं। यह सर्जना मानव मन को प्रभावित करती है और हमें संवेदना के शिखर की ओर ले जाती है। ज़माने की रफ़्तार के साथ ताल-सुर मिलाने का एक प्रयास आज (28-10-2016) अपनी यात्रा आरम्भ करता है...Copyright © रवीन्द्र सिंह यादव All Rights Reserved. Strict No Copy Policy. For Permission contact.
गुरुवार, 27 अगस्त 2026
जलप्रलय
गुरुवार, 20 मार्च 2025
सत्य की दीवार
सत्य की दीवार
उनका निर्माण था
कदाचित उन्हें
सत्य के मान का भान रहा होगा
सरलता और सादगी का जीवन
उनकी पहचान रहा होगा
मिथ्या वचन,छल,पाखंड,क्रूरता,अन्याय और दंभ
तब उस पवित्र दीवार से
परे ही रहे होंगे
नकारात्मक मूल्यों की गंध पर
विवेक की पंखुड़ियों का
सतत सख़्त पहरा रहा होगा
कालांतर में क्षरण हुआ
सजगता और
सत्य के प्रति आग्रह का
छल अति क्षुधित पाषाण-सा
टकराता रहा सत्य की दीवार से
अंततः दीवार क्षतिग्रस्त हुई
और बन गए झरोखे ही झरोखे
पतित मूल्यों के
उस प्राचीन दीवार में...
©रवीन्द्र सिंह यादव
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