बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

युद्ध और भूख

हम जानते हैं 

दुनिया में भूख का साम्राज्य 

युद्दों की देन है 

फिर भी कुछ खाए-पिए-अघाए 

युद्द कैसे हों 

इस रणनीति पर 

सोचते दिन-रैन हैं

पसरते पूँजी के पाँवों तले 

दब गई है चीत्कार भूखों की 

अब नहीं टोकती 

प्रबुद्ध मानवता 

युद्धोन्माद में डूबे दिमाग़ों को

विकृत सोच के हवाले  

छोड़ दिया है दुनिया को!

©रवीन्द्र सिंह यादव 


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