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रविवार, 23 सितंबर 2018

चिड़िया


चिड़िया हाँफती हुई 

घोंसले में दाख़िल हुई 

चोंच में दबाए चुग्गा 

बच्चों को खिलाया

हालात नाज़ुक हैं 

 बसेरे के आसपास 

टीवी पर 

समाचार देख रहे 

नन्हे बच्चों ने 

चिड़िया को बताया। 


मोबोक्रेसी के 

भयावह परिवेश में 

माँ कितनी रिस्क लेकर 

चुग्गा लेने जाती हो

चिड़ीमार गिरोहों से 

ख़ुद को 

कैसे बचाकर लौटती हो?


खेतों में उगनेवाले 

अन्न के दानों पर 

उपयोगितावादी मनुष्य 

केवल अपना 

अधिकार समझ बैठा है

अब नई-नई  

तरकीबों के साथ 

चिड़ियों को उड़ाने नहीं 

जान से मारने हेतु 

प्रकृति से उलझ बैठा है। 


स्वार्थ का समुंदर  

दिनोंदिन 

रातोंरात 

गहरा हो चला है

शयनरत शाख़ पर 

मासूम चिड़िया 

मारी जा रही है 

जैसे कोई 

अहर्निश सताती बला हो।

© रवीन्द्र सिंह यादव   


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