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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

हाइकु

 1. 
जलती बस्ती~ 
खड़ा है लावारिस 
संतरा-ठेला। 

2. 
दंगे में तख़्ती~ 
एक सौ पचास है 
दूध का भाव। 

3. 
संध्या की लाली~
क्षत-विक्षत लाश 
चौपाल पर। 

4. 
अर्द्ध-यामिनी~ 
जलते घरोंदों में 
इंसानी शव। 

5. 
भोर की लाली~ 
गली में ईंट-रोड़े  
भीड़ के हाथ।  
 
© रवीन्द्र सिंह यादव 

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

हाइकु

1.
गृह-वाटिका~
बाला भरे टोकरी 
हिना-पत्तियाँ।

2.
संध्या की लाली~
मेहंदी रचे हाथ
मींचे अखियाँ।

3.
सावन-सांझ~
शिला पर पीसती
हिना बालिका।

4.
सावन-भोर ~
हिना से चाँद-फूल
रची हथेली।

5.
बसंत-सांझ~
मेहंदी से लिखती
पिया का नाम।

6.
पूस की रात~
कँबल से बाहर
मेहंदी-हाथ।

7.
शरद-सांझ~
ताके पिया हथेली
मेहंदी रची। 

8.
मेघ नभ में~
माँ रचाये मेहंदी
बेटी के हाथ।

9.
फूली मेहंदी~
डाकिया के हाथ में
चिट्ठी का थैला।

10.
गाँव का मेला~
बालिका रचवाती
हाथ पे हिना।

11.
कुआँ किनारा~
मेहंदी पत्ता तोड़े
नन्ही बालिका।

12.
गोधूलि बेला~
मेहंदी झाड़ पर
सांप का जोड़ा।

© रवीन्द्र सिंह यादव




शनिवार, 7 जुलाई 2018

नदी के किनारे (हाइकु)

 सँकरी नदी 
थे उस पार आप  
गुफ़्तुगू आसाँ 

चलते रहे 
गये दूर तक
चाहा मिलन  

गयी आँधी
बुढ़ऊ नीम गिरा 
पुलिया बना 

ठिठक गया 
आना हुआ आपका
देखा आँखों में  

बिछड़ गये 
सदा के लिये हम 
फ़ैसला था ये। 

© रवीन्द्र सिंह यादव



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