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शुक्रवार, 12 जून 2020

करोना-काल में लाशें

जीते-जीते 

जीवन-शैली विकसित हुई 

शव को सम्मान 

मिलने की बात तय हुई 

आज करोना-काल में 

सघन या छितराई 

लाशों की भीड़ 

तलाश रही है 

अंत्येष्टि की गरिमा से भरा नीड़

भीड़ की भरमार में 

लकवाग्रस्त तंत्र 

भेज रहा है 

एक ही घर में 

एक ही व्यक्ति की 

दो-दो बार लाशें!

कोई भटक रहा है 

कई-कई दिन  

लेने अपनों की लाशें 

लाशों का हिसाब 

बार-बार बिगड़ रहा है 

कोई दफ़्तर-दफ़्तर 

एड़ियाँ रगड़ रहा है

कहीं दाह-क्रिया / दफ़नाने का 

उपेक्षित सरकारी रबैया

कहीं अविश्वास की नाव में  

बैठे हैं यात्री और खिबैया  

कचरा-गाड़ी पर शव...!

यह कैसा वक़्त का विप्लव!  

करोना-योद्धाओं का कैसा 

चिंतनीय विभव-पराभव

कुछ तो भर चुके हैं 

ग़ुस्से से लबालब

वर्जनीय-ग्रहणीय निर्देशों के बवंडर

बढ़ा रहे हैं रोज़-रोज़ संशय और डर

देख-सुन करोना महामारी का 

कसता शिकंजा     

हृदय कचोट रहा है

कोई निर्मम ऐसा भी है 

जो धन लूट-खसोट रहा है

दुनियाभर में लाशों की दुर्दशा के 

हृदयविदारक समाचार

कब तक देखेंगीं आँखें बार-बार?

एक अदृश्य दुश्मन से 

भयातुर है भीरु इंसानी दुनिया 

मास्क मुँह पर हाथों में दस्ताने

अनचीह्नी-सी हो गई है 

करोना-काल की दुनिया

बदली आब-ओ-हवा में 

नया रण-क्षेत्र हो गई है दुनिया।    

© रवीन्द्र सिंह यादव

शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

उठ खड़ी होती है जिजीविषा


नाव डगमग डोली 

तो 

माँझी पर 

टिक गयीं 

आशंकित आशान्वित आँखें, 

कोहरा खा गया 

दिन का भी उजाला 

अनुरक्त हो भँवरे की 

प्रतीक्षा कर रहीं सुमन पाँखें। 


सड़क-पुल के टेंडर 

अभी बाक़ी हैं 

कुछ अनजाने इलाक़ों में 

बहती नदियों और पगडंडियों के, 

अपने आदमी को 

मिले सरकारी सौग़ात 

इस तरह भँवर में 

अनवरत घूमते सोपान प्रगति के।   


विकल है आज तो बेकल मन 

परिवेश में गूँजता 

चीत्कार का व्याकुल स्वर,

प्रभा-मंडल में यह कैसा नक़ली आलोक 

नीरव निशा की गोद में 

तनिक विश्राम करके 

उठ खड़ी होती है जिजीविषा 

अनायास सिहरन का उन्मोचन कर।  

© रवीन्द्र सिंह यादव

मंगलवार, 19 सितंबर 2017

आँखें


ख़ामोश अदा चेहरे की,

व्यंगपूर्ण मुस्कान 

या 

ख़ुद को समझाता तसल्ली-भाव....?

आज आपकी डबडबाई आँखों में 

आयरिस के आसपास,

तैरते हुए चमकीले मोती देखकर.....

मेरे भीतर भी 

कुछ टूटकर बिखर-सा गया है......!  



ज़ार-ज़ार रोती आँखें 

मुझे भाती नहीं,

आँखें हैं कि

शिकायती-स्लेट बनने से 

अघाती नहीं। 


आपका कभी आँचल भीगता है 

कभी  मेरा  रुमाल,

बह जायें आँसू फिर देखिए  

चंचल नयनों के कमाल। 



दिल किसी का

यादें किसी की, 

सपने किसी के 

चक्षु किसी के,

प्रतीक्षा किसी की 

धड़कन किसी की,  

चैन-ओ-क़रार किसी का 

बे-क़रारी किसी की,

अक्स किसी का 

आँखें किसी कीं, 

दिल में समायी प्रीत किसी की 

कहो कैसा क़ुदरती अनुबंध है?


किसी दामन में सर झुकाकर 

सुकूं मिलता है भरी आँखों को,

क़लम कहाँ लिख पाती है  

 पाकीज़गी-ए-अश्क़ के उन ख़्यालों को।   


आप मेरे दिल में उतरे 

मैं  आपके  दिल  में,

गुफ़्तुगू  ख़ूब  हुई 

दो दिलों की महफ़िल में, 

तड़प के सिवा कुछ मिला क्या....?

खनकते एहसास लिये  

तमन्नाओं का हसीं कारवाँ मिला,

तभी तो चल पड़ा 

इश्क़ का नाज़ुक-सा सिलसिला। 


मैं अपनी गुस्ताख़ी  

ढूँढ़कर  ही  रहूँगा, 

ख़ज़ाना-ए-दिल बहने का 

सबब तलाश कर ही लूँगा, 

क्योंकि आपने 

आज मुझे टफ टास्क दिया है -

"दिल में ऐसा क्या चुभता है 

कि ज़ुबाँ चुप रहती है,

आँखें बयाँ करती हैं?"



कब से हम खुलकर  मुस्काये नहीं 

गये वक़्त की रुस्वाइयाँ  बयां करती हैं,

चेहरे  पर उदासी का पहरा 

और झुकी-झुकी पलकें 

बे-रूखी का क़िस्सा बयां करती हैं। 



है  हार  क़ुबूल  मुझे

नहीं मैं अना-पसंद 

रणछोड़दास जी का 

पथ अनुगमन करता हूँ,

चेहरे पर खिली तबियत हो  

ईष्ट  को  नमन  करता  हूँ।  

बस यही दुआ और इल्तिजा करता हूँ-

ज़िन्दगी को जीभर खिलने-मुस्कराने दो अब,

सपनों में भी आँसुओं को  न ज़ाया  होने दो अब। 

©रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दों के अर्थ /पर्यायवाची / WORD  MEANING 

आयरिस = आँख की पुतली / IRIS / PUPIL 

पाकीज़गी-ए-अश्क़= आँसुओं की पवित्रता / PURITY OF TEARS

सिवा (फ़ारसी पूर्वसर्ग) = सिवाए,अतिरिक्त,अलावा/EXCEPT   

ख़ज़ाना-ए-दिल= आँसू / TEARS 

गुस्ताख़ी  = ढिठाई, बे-अदबी,अशिष्टता /ARROGANCE 

टफ  टास्क = कठिन, चुनौतीभरा  कार्य / TOUGH TASK 

रुस्वाइयाँ = बदनामियाँ / DISGRACES 

अना-पसंद = अहंकारवादी,अहंवादी, अपने अहंकार को आगे रखने वाला / Egotist 

रणछोड़दास =श्रीकृष्ण का एक नाम / LORD KRISHNA 

ज़ाया = बरबाद ,नष्ट, नाश  / WASTE / DESTROY

ज़ार-ज़ार रोती आँखें = अत्यंत फूट-फूटकर रोती हुई आँखें /EYES WEEPING UNCONTROLLABLY  

चैन-ओ-क़रार = मन की शांति / PEACE OF MIND/CONTENTMENT


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