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शनिवार, 1 जनवरी 2022

अमन का गीत मेरा खो गया है...

अमन का गीत 

मेरा खो गया है

देश का युवा चेहरा

पर कटे पंछी-सा  

गर्दिश में खो गया है

वो फ़ाख़्ता 

जो गुलिस्तां में 

ग़म-ख़ोर गीत गाती है 

उसका गला 

अब तो रुँध-रुँधकर 

थर्राकर भर्रा गया है

वो चित्रकार 

रंग, कूची; कल्पना के साथ 

बस बेबस खड़ा है 

हालात के नारों को 

सुन-सुनकर घबरा गया है

वाणी पर नियंत्रण 

क़लम पर पाबंदी 

मतभिन्नता की आज़ादी

अभिव्यक्ति के आयाम

सत्ता से तीखे सवाल पर 

लेखक का वजूद चरमरा गया

गाँधी की हत्या से 

सब्र नहीं जिन्हें 

वे अब रोज़-रोज़ 

चरित्रहत्या कर रहे हैं

यह कौन है 

जो शांत माहौल में

उकसावे का परचम लहरा गया?

© रवीन्द्र सिंह यादव       


बुधवार, 6 मई 2020

चित्रकार

रंग 

तूलिका 

कैनवास 

उँगलियाँ 

कोई कलाकृति उकेरने में अक्षम हैं 

चित्रकार का चित्त-चितवन 

सचाई तलाशने 

आदर्श-लोक के सफ़र पर हैं 

जहाँ बदलाव और विद्रोह की तड़प

ज़ख़्मी होकर सो गई है। 

© रवीन्द्र सिंह यादव      
  

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

माँ (वर्ण पिरामिड)


माँ  
सृष्टि 
स्पंदन  
अनुभूति 
सप्त-स्वर में 
गूँजता संगीत 
वट वृक्ष की छाँव।  


माँ 
आँसू 
ममता 
संवेदना  
गोद में लोक 
जीवन आलोक
निर्झर-सा प्रवाह। 


माँ 
शब्द 
क़लम 
रचना है 
कैनवास है 
सनी है रंग में  
कूची चित्रकार की। 


माँ 
बीज 
फ़सल 
खलिहान 
रोपती गुण 
काटे अवगुण 
संयम का भंडार। 


माँ 
थामे 
अँगुली 
देती ज्ञान 
मिथ्या संसार 
चरित्र-निर्माण 
संस्कारवान पथ। 


माँ 
फूल 
महक
बग़िया में 
मोहक कूक   
पालती उसूल 
दे थपकी गा लोरी।


माँ 
राग 
प्रकृति
अरुणिमा 
भावों का गाँव
प्यारी धूप-छाँव
गौरव जीवन का।       

© रवीन्द्र सिंह यादव


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