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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

पागल कहते हैं लोग

ज़माना 

बहुत बुरा है 

कहते हुए 

सुने जाते हैं लोग 

मझदार से निकालकर 

किनारे पर कश्ती डुबोना

ऐसा तो नहीं चाहते हैं लोग 

दरीचों के सीनों में 

दफ़्न हैं राज़ कितने 

आहिस्ता-आहिस्ता 

बताते हैं लोग 

दास्तान-ए-हसरत 

मुसाफ़िर कब सुनाते हैं 

गले लगाने से पहले 

आजमाते हैं लोग

बिजलियाँ अक्सर 

गिरती रहतीं हैं 

फिर भी आशियाना 

बनाते हैं लोग

वो माँगता फिर रहा है 

औरों के लिए दुआ 

न जाने क्यों उसे 

पागल कहते हैं लोग। 

© रवीन्द्र सिंह यादव 

 

शनिवार, 17 नवंबर 2018

चिड़िया और इंसान



चिड़िया और इंसान

हैं सदियों पुराने मित्र,

सभ्यता के सफ़र में

चिड़िया वही इंसान विचित्र।


छोटी-सी ज़िंदगानी में

चिड़िया अपने बच्चों को

सिखाती है ढेरों उपाय

बाज़, उल्लू, बिल्ली, साँप-से

शिकारियों से बचाव।


दूर क्षितिज तक उड़ना

पानी-धूल में नहाना

दाना चुगना 

नीड़ का निर्माण करना   

फुदकना चहचहाना 

साँझ-सकारे सामूहिक गान

सामूहिकता में सौहार्द सहमति 

समृद्धि हेतु क़ाएम रखना।


इंसान अपने बच्चों को

जीवनभर सिखाता है

जीने की गूढ़ कला,

फिर भी अब तक

इंसानी-समाज  

मन-मुआफ़िक़ क्यों नहीं ढला?
   
© रवीन्द्र सिंह यादव

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जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...