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शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

ख़िज़ाँ ने फिर अपना रुख़ क्यों मोड़ा है?




मिटकर मेहंदी को

रचते सबने देखा है,

उजड़कर मोहब्बत को

रंग लाते देखा है?


चमन में बहारों का

बस वक़्त थोड़ा है,

ख़िज़ाँ ने फिर अपना

रुख़ क्यों मोड़ा है?


ज़माने के सितम से

न छूटता दामन है,

जुदाई से बड़ा

भला कोई इम्तिहान है?


मज़बूरी के दायरों में

हसरतें दिन-रात पलीं,

मचलती उम्मीदें

कब क़दम मिलाकर चलीं? 


दुनिया में वफ़ा की आबरू है

साथ ख़ौफ़-ए-जफ़ा है,

ज़मीं-आसमां किसी बेआसरा से

क्यों इतना ख़फ़ा हैं?

© रवीन्द्र सिंह यादव

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

चौकीदार


अपने चमन को हमने सँवारा  

बहाया पसीना सहेजे जज़्बात, 

रौनकों को नौंचने आ गई   

कौए और बाज़ की बारात।


पत्तियाँ हो रही थीं पल्लवित 

फूलों पर आ रहा था निखार, 

आ गये चरने-रौंदने बग़िया जानवर 

धर-धर अपनी-अपनी  बेरहम लात। 


रखवाली के लिए बैठाया 

एक अदद चौकीदार भी, 

लुटेरे करते रहे उसकी जय-जयकार

आत्ममुग्ध समझ न सका पते की बात। 


पूँजी का चरित्र 

लाभ में निहित है, 

नैतिकता की चर्चा 

अब करते रहो दिन-रात।   

© रवीन्द्र सिंह यादव

सोमवार, 8 जनवरी 2018

हवा गर्म हो रही है....


कैसा दौर आया है
आजकल
जिधर देखो उधर
हवा गर्म हो रही है
आया था चमन में
सुकून की साँस लेने
वो देखो शाख़-ए-अमन पर
फ़ाख़्ता बिलख-बिलखकर रो रही है।

दोस्ती का हाथ
बढ़ाया मैंने फूलों की जानिब
नज़र झुकाकर फेर लिया मुँह
शायद नहीं है वक़्त मुनासिब
सितम दम्भ और दरिंदगी के 
सर चढ़कर बोल रहे हैं
पगडंडियों की रेत
अंगारे सर्दियों में हो रही है।

ये ज़र्द सितारे
जो फ़लक से आ गिरे हैं 
ज़ख़्मी ज़मीं पर 
आओ इनमें रौशनी की
शाश्वत किरण ढूँढ़ते हैं
इंसानियत के सूखते
समुंदर में
देखो फिर बरसात हो रही है... !!!
#रवीन्द्र_सिंह_यादव 

शब्दार्थ / Word Meanings -
1. दौर = समय ,युग ,परिधि  / Era ,Age ,Circumference 
2. चमन = फूलों की बग़िया / Flower Garden 
3. सुकून = शान्ति ,चैन ,आराम, निस्तब्धता / Peace ,Rest, Feel Good,                   Tranquility  
4. साँस  = श्वांस, / Breath 
5. शाख़-ए-अमन= शान्ति की डाली / ऐसी शाखा जिस पर शान्ति हो,                               जीवन रूपी  वृक्ष में शान्ति एक शाखा है / Bough of peace
6. फ़ाख़्ता= शांति का प्रतीक कबूतर / कबूतरी  / Dove 
7. जानिब= ओर, तरफ़, सू  / Towards, Side, From, Direction 
8. वक़्त= समय / Time 
9. मुनासिब = उपयुक्त,सही, उचित / Suitable , Proper 
10. सितम= अत्याचार, ज़ुल्म, अन्याय / Injustice ,Outrage ,Oppression
11. दंभ = अहंकार, दर्प, घमंड, मद / Ego 
12. दरिंदगी = ख़ौफ़नाक आचरण ,वहशीपन ,पाशविक आचरण/               Barbarism, Bestiality 
13. सर चढ़कर बोलना = जिसे किसी प्रकार से छिपाया न जा सके / 
Tough to hide 
14. पगडंडियाँ = पैदल चलने के लिए सँकरे रास्ते / 
Foot Paths, By-Ways 
15. रेत = बालू / Sand 
16. अंगारे= शोले / Heated Coals 
17. ज़र्द = पीला / Yellow, Pale 
18. फ़लक = आकाश, नभ, आसमान / Sky ,Heaven 
19. ज़ख़्मी = घायल, चोटिल / Wounded, Hurt 
20. ज़मीं = धरती, धरा, पृथ्वी / Earth, Land 
21. शाश्वत= न मिटने वाला, जो सदा से चला आ रहा हो / Eternal,                             Ageless 
22. इंसानियत = मानवता / Humanity 

23. समुंदर = समुद्र, सागर  / Sea 

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

चाँद पूनम का


कभी भूलती नहीं ये लगती बड़ी सुहानी,
चंदा सुनेगा आज फिर मेरी वही कहानी।
दोहराता है ये मन
है अजीब-सी लगन
पूनम की रात आयी
नूर-ए-चश्म लायी
हसीं चंदा ने 
बसुंधरा पर 
धवल चाँदनी बिखरायी 
चमन-चमन खिला था
 मौसम-ए-बहार  का 
प्यारा-सा सिलसिला था
कली-कली पर शोख़ियाँ 
और शबाब ग़ज़ब खिला था
 एक सरल  सुकुमार कली से 
आवारा यायावर भ्रमर मनुहार से मिला था
हवा का रुख़ प्यारा बहुत नरम था
दिशाओं का न कोई अब भरम था  
राग-द्वेष भूले
बहार में सब झूले 
फ़ज़ाओं में भीनी महकार थी 
दिलों में एकाकार की पुकार थी  
शहनाइयों की धुन कानों में बज रही थी
चाह-ए-इज़हार  बार-बार मचल रही थी
ज़ुल्फ़-ए-चाँद को संवारा
कहा दिल का हाल सारा
नज़र उठाकर उसने देखा था 
चंदा को आसमान में
लगा था जैसे रह गया हो 
उलझकर तीर एक कमान में 
 फिर झुकी नज़र से उसने 
घास के पत्ते को था सहलाया
छलक पड़े थे आँसू 
ख़ुद को बहुत रुलाया
इक़रार पर अब यकीं था आया
था इश्क़ का बढ़ चला सरमाया
नज़रें  मिलीं तो  पाया
चाँद को ढक  रही  थी
बदली की घनी छाया
पानी में दिख रही थी 
        लरज़ते चाँद की प्रतिछाया... 
नील गगन में चंदा आयेगा बार-बार  
 शिकवे-गिले सुनेगा आशिक़ों की ज़ुबानी,
चंदा सुनेगा आज फिर मेरी वही कहानी।

#रवीन्द्र सिंह यादव  

इस रचना को सस्वर सुनने के लिए YouTube Link-
https://youtu.be/7aBVofXYnN0

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