शनिवार, 16 मई 2026

कॉकरोच और परजीवी

जिसके मन-मस्तिष्क में 

देश के सजग-सक्रिय नागरिकों के प्रति 

कुंठा और खिन्नता से लबरेज़ 

घनघोर घृणा भरी हो 

वह हमारे संविधान का 

संरक्षक होने की पात्रता नहीं रखता 

शासन-प्रशासन में 

पारदर्शिता लाने हेतु सक्रिय 

प्रबुद्ध स्वतंत्र कार्यकर्ताओं को 

कॉकरोच और परजीवी कहना 

सर्वथा अस्वीकार्य है

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो या 

सूचना का अधिकार 

संविधान ने दिये हैं अधिकार 

जो व्यक्ति विशेष की कृपा पर निर्भर नहीं

समाज की कमाई है व्यक्ति की नहीं!  

© रवीन्द्र सिंह यादव  

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जिसके मन-मस्तिष्क में  देश के सजग-सक्रिय नागरिकों के प्रति  कुंठा और खिन्नता से लबरेज़  घनघोर घृणा भरी हो  वह हमारे संविधान का  संरक्षक होने ...