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रविवार, 16 मई 2021

एम्बुलेंस

शहर में बद-हवासी का आलम 

अस्पतालों-घरों में मातम ही मातम  

सड़कों पर दौड़तीं एम्बुलेंस

ऑक्सीजन लिए 

साँसों को जूझते करोना मरीज़ लिए   

घर से अस्पताल 

अस्पताल-दर-अस्पताल 

प्रतीक्षा करतीं कतार में 

साँसें थमीं तो दौड़ीं शमशान 

पूरी रफ़्तार में 

फिर प्रतीक्षा लंबी कतार में 

दौलत के भूखों का 

कुरूप चेहरा देखा 

इस लघु सफ़र में 

मानवीय संवेदना के किरदार भी 

लिख रहे हैं क्रूर काल के कपाल पर 

ख़ुद को दाँव पर रख 

साँसों की सच्ची कहानी! 

© रवीन्द्र सिंह यादव


सोमवार, 22 मार्च 2021

मत लिखो कि...

मत लिखो कि सरकार 

भ्रष्ट है 

मत लिखो कि 

निरीह जनता 

सरकारी नीतियों से त्रस्त है

मत लिखो कि 

धूर्त पाखंडी

उन्माद के बीज बो रहे हैं 

मत लिखो कि 

युवा षड्यंत्र के मोहरे हो रहे हैं

मत लिखो कि 

न्याय सहज सुलभ नहीं है 

मत लिखो कि

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब नहीं है 

मत लिखो कि 

व्यवस्था सड़-गल गई है 

मत लिखो कि 

सत्ता संवेदना को मसल गई है

मत लिखो कि 

ऑक्सीजन के अभाव में बच्चे मर रहे हैं 

मत लिखो कि 

दंगाई संरक्षण में हरी घास चर रहे हैं 

मत लिखो कि 

क़ानून का पालन मनमाना हो रहा है  

मत लिखो कि 

भूख से व्याकुल इलाक़ा रो रहा है 

मत लिखो कि 

शोषण के सूत्र शातिर दिमाग़ों की पूँजी है 

मत लिखो कि 

शिक्षा में मनगढंत विषयों को लाने की क्यों सूझी है

मत लिखो कि 

117 दिन से किसान आंदोलनरत क्यों हैं?

मत लिखो कि 

सरकारी संपत्तियाँ ख़रीदनेवालों संग 

सरकारी उँगलियाँ मित्रवत क्यों हैं?

मत लिखो कि 

दलों को चंदा कैसे मिल रहा है?

मत लिखो कि 

आदमी का ईमान कैसे हिल रहा है?

मत लिखो कि 

गवाह डराए धमकाए ख़रीदे जा रहे हैं 

मत लिखो कि 

पेड़ क्यों काटे जा रहे हैं? 

लिखो कि 

समय का सच 

अचर्चित रहकर गुज़र जाने का हामी है 

स्वतंत्रता खोकर जीवन जीना तो बस नाकामी है!  

© रवीन्द्र सिंह यादव  

   

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

जिओ और जीने दो

ख़ुद  जिओ 

अपने जियें,

और 

काल-कवलित 

हो जायें। 




कितना नाज़ां / स्वार्थी  

और वहशी है तू ,

तेरे रिश्ते 

रिश्ते हैं 

औरों के फ़ालतू।




चलो अब फिर 

समझदार,

नेक हो जायें,

अपनी ज़ात 

फ़ना होने तक 

क्यों  बौड़म  हो जायें....?



क़ुदरत  की 

करिश्माई कृति = इंसान 

सृजन को 

विनाश के 

मुहाने पर 

लाने वाला =इंसान। 




महक फूलों की 

दिशा कब 

तय कर पाती,

आब -ओ - हवा 

सरहदों के

नक़्शे  कभी  न  पढ़ पाती।

अंडे रखने को 

तिनके 

चुनकर 

चिड़िया चोंच  में दबाकर ,

सीमांत  इलाक़ों  में    

कुछ  इधर  से 

कुछ  उधर  से  लाती। 




बहती है नदी

ख़ुद क्या ले पाती,

रौशनी सूरज की 

जगमगाती जग को,

तब हरी पत्तियां 

भोजन बनातीं,

शुभ्र चाँदनी  में  रातें 

 ख़ूब  खुलकर खिलखिलातीं । 




ऑक्सीजन 

देते-देते  पेड़

कभी न हारे हैं ,

इंसान तेरी 

पैसे  की  हवस ने 

कितने मज़लूम मासूम मारे हैं। 



तमसभरी  राह में 

कोई लड़खड़ा गया है,

अँधेरा बहुत 

अब  तो  गहरा गया है, 

घनेरा  आलोचा गया अँधेरा,

 अब दरवाज़े पर एक दीपक जलायें ,

उकता  गया  है  मन.......  चलो 

नींद आने तक दादी से सुनें कथाऐं। 

#रवीन्द्र सिंह यादव 


शब्दों के अर्थ / Word Meanings 


और = अन्य ,दूसरे,दूसरा ,अतिरिक्त /Others ,Another, And,More 

काल-कवलित = मृत ,मर चुका ,निष्प्राण / Dead

नाज़ां = घमंड में चूर ,गर्वित /Proud ,Arrogant

वहशी =जंगली , सनकी ,Crazy ,Wild

फ़ालतू = अनावश्यक ,अतिरिक्त / Extra ,over

नेक = दयालु ,भला /Kind , One who possess noble-nature

फ़ना = नष्ट होना , विनाश होना,नष्ट-भ्रष्ट होना ,तहस-नहस होना / Destruction,Ruin 

ज़ात = जाति ,नश्ल / Caste ,Race 

बौड़म = कुंद-दिमाग़,  मंद-बुद्धि ,सुस्त -दिमाग़ / Duffer ,Stupid , Awkward 

क़ुदरत = प्रकृति , ब्रह्माण्ड,काएनात  /Nature ,Universe ,World 

करिश्माई -कृति = अदभुत रचना ,अनुपम सृजन , Wonderful Creation 

सृजन = रचना करना ,निर्माण करना / Creation 

विनाश = समाप्त होना ,नाश /नष्ट होना , Destruction 

मुहाने पर = मुख पर (जैसे नदी का मुहाना )/ At the mouth ,Outfall 

आब -ओ -हवा =जलवायु ,परिवेश ,माहौल / Climate ,Environment 

सरहदों = सीमाओं, हदों /Borders ,Limits ,Boundaries 


चोंच = मुख  का अग्र , नुकीला,कठोर  भाग  जो भोजन आदि को पकड़ने  में सहायक होता है , थूथन ,थूथनी / Beak 


सीमांत = जहां सीमा का अंत हो, सीमावर्ती /Frontier 

शुभ्र = चमकीली /Bright

हवस = अंधी चाह ,वासना, / Desire ,Greed ,Curiosity 

मज़लूम =  दबा-कुचला ,पीड़ित , जिससे ग़लत व्यवहार किया गया हो / Oppressed ,Injured ,One who is  treated in  wrong manner 

मासूम = निरपराध ,निर्दोष / Innocent 

तमसभरी राह =अँधेरे में डूबा मार्ग ,Dark Path 

लड़खड़ा गया = जिसके क़दम डगमगा गए हों , क़दम  चूकना, पाँव टेड़े -मेढ़े पड़ना /Staggered 

घनेरा  आलोचा गया = सघन रूप से जिसकी आलोचना /बुराई की गयी हो / Intense Criticism 

उकता गया है = ऊब गया है / Fad up 

मन = जी ,जियरा ,जिया ,मानस ,चित्त , 40 किलो वज़न भार की नाप (Mound ), Mind ,Psyche

चोंच = मुख  का अग्र , नुकीला,कठोर  भाग  जो भोजन आदि को पकड़ने  सहायक होता है , थूथन ,थूथनी / Beak 
  

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