फ़ासले
क़ुर्बतों में बदलेंगे
एक रोज़,
होने नहीं देंगे
हम
इंसानियत को
ज़मीं-दोज़।
फ़ासले
पैदा करना तो
सियासत की
रिवायत है,
अदब को
आज तक
अपनी
ज़ुबाँ की
आदत है।
आग
बाहर तो दिखती है
अंदर भी
रहा करती है,
भूमंडलीकरण का
बे-हया धुआँ है
चिड़िया
ख़ौफ़ में
उड़ा करती है।
प्रियंवदा/ प्रियंवद की
तलाश
जारी रहेगी जहां में
अनवरत,
ज़माने की
बेरहम हवाएँ
कर लें
पुरज़ोर
जी भरकर ख़िलाफ़त।
© रवीन्द्र सिंह यादव
शब्दार्थ /Word Meanings
फ़ासले = दूरी, दूरियाँ, अंतर / Distance
क़ुर्बतों में = नज़दीकियों में, निकटताओं में / In Nearness
ज़मीं-दोज़ = भूमिगत, ज़मीन के अंदर / Underground
सियासत = राजनीति / Politics
रिवायत = परंपरा / Tradition
प्रियंवदा/ प्रियंवद = प्रिय बोलने वाली / वाला, मृदुभाषी


