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सोमवार, 16 दिसंबर 2019

फ़ासले


फ़ासले 

क़ुर्बतों में बदलेंगे 

एक रोज़, 

होने नहीं देंगे 

हम 

इंसानियत को 

ज़मीं-दोज़। 


फ़ासले 

पैदा करना तो 

सियासत की 

रिवायत है,

अदब को 

आज तक 

अपनी 

ज़ुबाँ की 

आदत है। 



आग 

बाहर तो दिखती है 

अंदर भी 

रहा करती है,

भूमंडलीकरण का 

बे-हया धुआँ है

चिड़िया 

ख़ौफ़ में 

उड़ा करती है। 



प्रियंवदा/ प्रियंवद की 

तलाश 

जारी रहेगी जहां में 

अनवरत,

ज़माने की 

बेरहम हवाएँ 

कर लें 

पुरज़ोर 

जी भरकर ख़िलाफ़त। 
   
© रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दार्थ /Word Meanings 

फ़ासले = दूरी, दूरियाँ, अंतर / Distance 
क़ुर्बतों में = नज़दीकियों में, निकटताओं में / In Nearness   
ज़मीं-दोज़ = भूमिगत, ज़मीन के अंदर / Underground  
सियासत = राजनीति / Politics 
रिवायत = परंपरा / Tradition 
प्रियंवदा/ प्रियंवद = प्रिय बोलने वाली / वाला, मृदुभाषी   



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