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बुधवार, 1 अप्रैल 2026

जारी है युद्ध

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जन्मे 

कुबुद्धि बालक  

अब तक तो वयोवृद्ध हो चुके हैं

हिंसक उन्माद में डूबकर

मानसिक संतुलन खो चुके हैं  

अमेरिका और इज़राइल 

मिलकर लड़ रहे हैं युद्ध 

अकेले ईरान से

महीना भर भी कम लग रहा है इन्हें 

लड़ते-लड़ते भीषण युद्ध 

मारे जा रहे हैं मासूम बच्चे 

जिनका कोई अपराध नहीं 

मारे जा रहे हैं लोग 

जिनके पास बचाव के लिये कोई हथियार नहीं 

मारे जा रहे हैं लगातार 

निरपराध परिंदे और सुकोमल तितलियाँ 

जो अनभिज्ञ हैं विकृत मानवीय सोच से 

क्या दोष है पर्यावरण का 

जो डूब गया है 

बिषैले बारूद के गर्द-ओ-ग़ुबार में 

सामूहिक मृत्यु को सहज बनाते 

विवेकहीन नेताओं के आदेश

भरा है जिनमें तकनीकी आवेश  

अपने लिये सुखद मृत्यु की कल्पना में डूबे हैं 

धिक्कार है ऐसे संवेदनाविहीन दिमाग़ों पर!

जागो शांति के मसीहाओ!

वक़्त रहते पृथ्वी को वीरान होने से बचा लो!

और कोई कुबुद्धि ऐसी क्षमता में न हो 

जो ले जाए दुनिया को 

परमाणु-युद्ध की ओर 

विवेकशील मस्तिष्क को ही सौंपना 

अब देश की बाग-डोर!    

 © रवीन्द्र सिंह यादव  


गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

वे बच्चे अब कहाँ हैं ?

वे बच्चे अब कहाँ हैं ?

जो रुक जाया करते थे 

रास्ते में पड़े 

असहाय घायल को उठाकर 

यथासंभव मदद करने

वक़्त ज़ाया होने 

कपड़े ख़ून से सन जाने की 

फ़िक्र किए बग़ैर

पवित्र विचारों का 

पौधा रोपते थे  

वे तड़पते घायल का 

सिर्फ़ वीडियो नहीं बनाते थे 

संवेदना के गहरे गीत रचते थे।  

© रवीन्द्र सिंह यादव  

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