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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

चींटियाँ

देख रहा हूँ चींटियों को

कतारबद्ध चलते हुए 

कुछ जातीं चींटियाँ 

कुछ आतीं चींटियाँ

सोच रहा हूँ 

कितनी दिमाग़दार हैं चींटियाँ

अपनी रानी की 

सेवादार / तीमारदार हैं चींटियाँ

विज्ञान-साहित्य ने 

इन्हें भी नाम दिया है

रानी और मज़दूर चींटियाँ

अफ़सोस!

यहाँ भी 

पूँजीवाद-सा भेदभाव!  

एकता-शक्ति का 

अनुपम उदाहरण हैं चींटियाँ

अंडा ले बिल से निकल पड़ें 

तो कारण हैं चींटियाँ

लगतीं हैं अब तो 

प्रवासी श्रमिकों-सीं चींटियाँ

किसी सियासी सरहद से 

बेख़बर रहतीं हैं चींटियाँ 

बड़े लक्ष्य 

हौसले से हासिल करने   

हाथ डालतीं हैं चींटियाँ

सतत प्रयत्नशील रहने का 

सबक़ सिखातीं हैं चींटियाँ।

 ©रवीन्द्र सिंह यादव      

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