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रविवार, 3 फ़रवरी 2019

स्टोन क्रशर


पथरीले हठीले 

हरियाली से सजे पहाड़ 

ग़ाएब हो रहे हैं,

बसुंधरा के श्रृंगार  

खंडित हो रहे हैं। 


एक अवसरवादी 

सर्वे के परिणाम पढ़कर 

जानकारों से मशवरा ले, 

स्टोन क्रशर ख़रीदकर 

एक दल में शामिल हो गया। 


चँदा भरपूर दिया 

संयोगवश / धाँधली करके 

हवा का रुख़ 

सुविधानुसार हुआ, 

पत्थर खदान का ठेका मिला 

कारोबार में बरकत हुई,  

कुछ और स्टोन क्रशर की 

आमद हुई।  


खदान पर कार्यरत मज़दूर 

घिरे हैं गर्द-ओ-ग़ुबार से 

पत्थरों को तोड़कर, 

बनती पृथक-पृथक आकार की

बेडौल गर्वीली गिट्टी,

पत्थर होते खंड-खंड 

महीन से महीनतर, 

फिर महीनतम होती

चूरा-चूरा गिट्टी,

मज़दूरों की साँसों के रास्ते 

फेफड़ों में जमा हो रही है, 

और दौलत!

तथाकथित नेता की 

तिजोरियों में!


अगले चुनाव तक 

ठेकेदार नेता हो जायेगा 

और मज़दूर

भगवान को प्यारा हो जायेगा!

© रवीन्द्र सिंह यादव


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