रावण का
विस्तृत इतिहास ख़ूब पढ़ा,
तीर चलाये मनभर
प्रतीकात्मक प्रत्यंचा पर चढ़ा।
बुराई पर अच्छाई की
लक्षित / अलक्षित विजय का,
अभियान दो क़दम भी आगे न बढ़ा!
वक़्त की माँग पर
ठिठककर आत्मावलोकन किया,
तो पाया पुरातन परतों में
वर्चस्व का काला दाग़ कढ़ा।
©रवीन्द्र सिंह यादव