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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

जीवन के रीते तिरेपन बसंत...

 


जीवन के 

रीते 

तिरेपन बसंत

मेरे बीते 

तिरेपन बसंत  

बसंत की 

प्रतीक्षा का 

हो न कभी अंत

प्रकृति की 

सुकुमारता का 

क्रम-अनुक्रम  

चलता रहे 

अनवरत अनंत 

नई पीढ़ी से पूछो-

कब आया बसंत? 

कब गया बसंत...?  

कलेंडर पत्र-पत्रिकाओं में 

सिमट गया बसंत!

© रवीन्द्र सिंह यादव



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