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शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

रेल-हादसा (वर्ण पिरामिड)



1. 

था 

क्रूर 

हादसा 

दशहरा 

अमृतसर 

रेल-रावण को 

दोष मढ़ते हम। 


2. 

ये

नेता  

मौत में 

तलाशते 

अपनी जीत 

संवेदना लुप्त 

दोषारोपण जारी। 


3. 

वे 

लेते 

वेतन 

सरकारी 

हैं अधिकारी 

ओढ़ते लाचारी 

क्यों जनता बेचारी? 



4. 

थी 

एक 

जिज्ञासा 

रावण को 

देखें जलता 

वीडियो बनाते 

क्षत-विक्षत हुए। 


5. 

है 

छाया 

मातम 

शहर में 

चीख़-पुकार 

  मौन है मंज़र 

हुए यतीम बच्चे।  

© रवीन्द्र सिंह यादव 

शनिवार, 13 अक्टूबर 2018

तितली तूफ़ान

दिल में  
तूफ़ान रहा होगा 

आँखों में 

दरिया बहा होगा 

जब 

तितली तूफ़ान 

उड़ीसा में 

तबाही फैलाकर

ख़ून-पसीने की कमाई से बने 

नाज़ुक अरमानों से सजे  

आशियाने उजाड़ता 

आगे बढ़ा होगा 

बचपन और बुढ़ापा 

बेबसी के साये में 

क़ुदरत के क़हर से 

ख़ूब चिढ़ा होगा 

हमने अब 

सीख लिया है 

तूफ़ान से लड़ने का हुनर 

राहत में जुटते हैं जवान 

आबाद करते हैं गाँव-शहर  

ख़ौफ़नाक मंज़र 

पैदा करने वाले 

चक्रवात को 

क्यों दिया है 

एक नाज़ुक-सा नाम 

एक मासूम सवाल करता है 

तितली को क्यों करते हो बदनाम?

आदमी ने बोयी है फ़सल दुश्वारियों की 

तूफ़ान तुमने राह क्यों पकड़ी आसानियों की


© रवीन्द्र सिंह यादव

सोमवार, 30 जुलाई 2018

बारिश के रंग (पाँच ताँका)


हटाओ फूल

जो बने प्लास्टिक से

देखो बगिया,

आ गया है सावन

ज़ख़्मों का मरहम। 



आये उमड़

मेघदूत नभ में

लाये सन्देश,

शोख़ लफ़्ज़ सुनने

थी सजनी बे-सब्र।


पवन चली

खुल गयी खिड़की

फुहार आयी,

भिगोया तन-मन

बारिश में अगन।



मेघ मल्हार 

साथ आयी बहार 

बोले पपीहा,

 है घटा घनघोर

नाचे झूम के मोर।


नदी उफनी

हुई है मटमैली

फैले किनारे,

बहते हैं सपने

बिछड़ते अपने।

                                      © रवीन्द्र सिंह यादव



शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

नाम ( तीन क्षणिकाऐं )



1
वो नज़र फिरी
तो क्या हुआ
दास्तान-ए-ग़म की
लज़्ज़त तो बरक़रार है,
मेरे क़िस्से में उनका
उनके में मेरा नाम
आज भी शुमार है।


2
सहरा में
रेत का
चमकना
मानो
सितारों की
झिलमिल चिलमन
के परे हो
मेरी कहकशाँ
ख़ुश हूँ कि
उनके फ़लक़ पर है
मेरा भी नाम-ओ-निशाँ।  

3
तन्हा सफ़र
भला किस
मुसाफ़िर को  
अच्छा लगा,
वो क़हक़हे
वो दिल्लगी
जो थी दिल-नशीं
यादों में वो नाम
चलते-चलते
सच्चा लगा।
© रवीन्द्र सिंह यादव

शनिवार, 2 जून 2018

कमाई का हक़ जब माँगता है किसान...

बाँझ हो जाती है 
ज़मीं
नक़ल बाज़ार की  
करता है 
जब किसान 
सरकार को 
आता है पसीना
पसीने की 
कमाई का भाव  
जब माँगता है किसान।  



#रवीन्द्र सिंह यादव 

गुज़रे हुए सालों की तरफ़

गुज़रे हुए 
सालों की तरफ़ 
दौड़ी है आज 
थकी बेचैन नज़र 
फ़िक़रे और तंज़ का 
वो दौर 
जिसमें नहीं था 
कोई हम-सफ़र।

चाँद से माँगी थी 
शबनम में भीगी 
ठंडी चाँदनी 
मगर सूरज 
अड़ गया 
दिखाने अपनी 
शोलों-सी मर्दानगी। 

धूप सहन न हुई 
तो आये 
पीपल के 
घने साये में 
हवा को न जाने 
क्या हुआ 
उड़ा ले गयी पत्ते 
किसी के बहकाबे में। 

शहर से 
आया था गाँव 
शुद्ध हवा की ख़ातिर 
पेड़ काटे 
ईंट-भट्टे में जला दिये 
इंसान हो गया है 
बड़ा शातिर।  


चमन तक 
साथ चले हम-नवा 
बयाबान आया 
तो किनारा कर गये 
वक़्त के साथ 
बदला है इंसान भी  
वो पीठ पर वार 
दोबारा कर गये।  

#रवीन्द्र सिंह यादव 



रविवार, 27 मई 2018

तीन क्षणिकाऐं

क्षणिकाऐं 


स्वप्न-महल  

बनते हैं महल 
सुन्दर सपनों के 
चुनकर 
उम्मीदों के 
नाज़ुक तिनके 
लाता है वक़्त 
बेरहम तूफ़ान 
जाते हैं बिखर 
तिनके-तिनके। 


सफ़र 

जीवन के 
लम्बे सफ़र में 
समझ लेता है 
दिल जिसे हमराही  
दो क़दम 
साथ चलकर 
बिछड़ जाते हैं 
बेड़ियाँ हालात की 
बनती हैं कब सवाली। 

जुदाई 

मिलन के लम्हात 
गुज़रे 
पहलू में बैठे-बैठे 
सुनते रहे 
बुलबुल की सदायें 
होंठों को दबाये-दबाये 
जब मिला 
जुदाई का ग़म 
मतलब-ए-उल्फ़त को 
समझ सके हैं हम।   
#रवीन्द्र सिंह यादव 

बुधवार, 23 मई 2018

लोगों को इंसाफ़ कैसे मिलेगा ?

दादा (पोते से ): कोई नया समाचार हो तो सुनाओ.....

पोता : सब बासी समाचार हैं, हाँ एक ताज़ा समाचार है।

दादा : क्या है, सुनाओ।

पोता : तमिलनाडु में कॉपर प्लांट का विरोध कर रही भीड़ पर पुलिस ने
            गोली चलाई,कई घायल; 11 मरे !

दादा : राम-राम !!! लोग क्यों कर रहे थे विरोध ?

पोता : फैक्टरी प्रदूषण फैला रही है। लोगों का जीना दूभर हो गया है। 

दादा : लोगों का विरोध तो जाएज़ है तो गोली क्यों चलाई पुलिस ने ?

पोता : पुलिस का कहना है कि भीड़ हिंसक होकर अनियंत्रित हो गयी थी।

दादा : हिंसक प्रदर्शन तो ना-जाएज़ है लेकिन पुलिस गोली चलाने के अलावा
           कोई और विकल्प क्यों नहीं अपनाती ?

पोता : हाँ, किन्तु लोग 100 दिन से प्लांट बंद करने की शांतिपूर्ण माँग कर रहे थे।
          प्लांट तक जाने से पुलिस ने  लोगों को रोका क्योंकि हाई कोर्ट ने प्लांट की
          सुरक्षा का आदेश दिया है।

दादा : वाह ! नागरिकों  की सुरक्षा का क्या?  सरकार अहिंसक आन्दोलनों की आवाज़
          नहीं सुनती तो लोग धैर्य खोने लगते हैं परन्तु हिंसा पर उतर आना किसी
          समस्या का हल नहीं है।

पोता : सरकार ने मुआवज़े की घोषणा कर दी है। मृतक  के परिजन को
           सरकारी नौकरी  और 10 लाख रुपये।

दादा : लोगों की जान लेकर सरकार राहत की घोषणा क्यों करती है ?

पोता: मामले को ठंडा करने और लोगों का क्रोध शांत करने के लिए।

दादा : जब सरकार को मालूम है कि प्लांट प्रदूषण फैला रहा है तो
           बंद क्यों नहीं करवाती ?

पोता :बहुराष्ट्रीय कम्पनी का प्लांट है।

दादा : तो क्या हुआ, लोगों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ की इजाज़त उसे किसने दी ?

पोता : यह बड़ा खेल है।

दादा : कुछ समझाओ भी।

पोता : ऐसी कम्पनियाँ अधिकारियों को रिश्वत देती हैं और राजनैतिक दलों
          (सत्तापक्ष और विपक्ष ) को मुँह भरकर चंदा देती हैं तथा कुछ नेताओं
          की सिफ़ारिश पर होशियार-मज़बूर, चतुर-चालाक और  धूर्त लोगों को
           नौकरियाँ देती हैं। बदले में सरकारों से ना-जाएज़ सहूलियतें हासिल करती हैं।

दादा : फिर लोगों को इंसाफ़ कैसे मिलेगा ? चंदा सरकारों को लाचार बना देता है।

पोता : कुछ लोग एनजीओ के ज़रिये अपना और देश का हित साध रहे हैं,
           मानवाधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। अब तो भारत सरकार ने क़ानून बना
           दिया है -
          "सन 1976 से अब तक राजनैतिक दलों द्वारा स्वीकार किये गये अवैध
           विदेशी चंदे की कोई जाँच नहीं होगी।"

दादा : तुम्हारी बातों से मेरा मन व्यथित हो चला है। अब मुझे अकेला छोड़ दो
          ताकि उन बिलखते  परिवारों, घायलों और  जान क़ुर्बान करने वालों के
          लिए प्रार्थना कर सकूँ।

( दादा जी ध्यानमग्न हो गये , पोता सोशल मीडिया पर ऑनलाइन प्रतिक्रिया लिखने में व्यस्त हो गया। )

#रवीन्द्र सिंह यादव       

गुरुवार, 3 मई 2018

नींद


बचपन में समय पर

आती थी  नींद,

कहानी दादा-दादी की 

लाती थी नींद। 

अब आँखों में

किसी की तस्वीर बस गयी है,

नींद भी क्या करती

कहीं और जाकर बस गयी है।

#रवीन्द्र सिंह यादव



शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

चाँद पूनम का


कभी भूलती नहीं ये लगती बड़ी सुहानी,
चंदा सुनेगा आज फिर मेरी वही कहानी।
दोहराता है ये मन
है अजीब-सी लगन
पूनम की रात आयी
नूर-ए-चश्म लायी
हसीं चंदा ने 
बसुंधरा पर 
धवल चाँदनी बिखरायी 
चमन-चमन खिला था
 मौसम-ए-बहार  का 
प्यारा-सा सिलसिला था
कली-कली पर शोख़ियाँ 
और शबाब ग़ज़ब खिला था
 एक सरल  सुकुमार कली से 
आवारा यायावर भ्रमर मनुहार से मिला था
हवा का रुख़ प्यारा बहुत नरम था
दिशाओं का न कोई अब भरम था  
राग-द्वेष भूले
बहार में सब झूले 
फ़ज़ाओं में भीनी महकार थी 
दिलों में एकाकार की पुकार थी  
शहनाइयों की धुन कानों में बज रही थी
चाह-ए-इज़हार  बार-बार मचल रही थी
ज़ुल्फ़-ए-चाँद को संवारा
कहा दिल का हाल सारा
नज़र उठाकर उसने देखा था 
चंदा को आसमान में
लगा था जैसे रह गया हो 
उलझकर तीर एक कमान में 
 फिर झुकी नज़र से उसने 
घास के पत्ते को था सहलाया
छलक पड़े थे आँसू 
ख़ुद को बहुत रुलाया
इक़रार पर अब यकीं था आया
था इश्क़ का बढ़ चला सरमाया
नज़रें  मिलीं तो  पाया
चाँद को ढक  रही  थी
बदली की घनी छाया
पानी में दिख रही थी 
        लरज़ते चाँद की प्रतिछाया... 
नील गगन में चंदा आयेगा बार-बार  
 शिकवे-गिले सुनेगा आशिक़ों की ज़ुबानी,
चंदा सुनेगा आज फिर मेरी वही कहानी।

#रवीन्द्र सिंह यादव  

इस रचना को सस्वर सुनने के लिए YouTube Link-
https://youtu.be/7aBVofXYnN0

गुरुवार, 26 अक्टूबर 2017

यादें

यादों का यह  कैसा जाना-अनजाना सफ़र है, 

भरी फूल-ओ-ख़ार से आरज़ू की रहगुज़र है। 



रहनुमा हो  जाता  कोई, 


मिल जाते हैं हम-सफ़र,


रौशनी बन  जाता  कोई,


हो  जाता   कोई   नज़र,


ऐसी लगन बेताबियों की,


हो जाता कोई दर-ब-दर है।



याद   धूप   है  याद  ही  छांव  है,


तड़प-ओ-ख़लिश का एक गांव है, 


याद  रात   है  याद  ही   दिन  है,


न फ़लक़-ज़मीं पर होता  पांव है,


हिय में  हूक  होती  है  पल-पल,


बस बेक़रारी में चश्म-ए-तर  है। 



सुध  न  तन  की  न  ही मन की,


तसव्वुर में रहती  तस्वीर उनकी,


ठौर-ए-वस्ल ताजमहल लगता है,


आब-ए-चश्म गंगाजल लगता है,


बे-ख़ुदी में रहती किसे क्या ख़बर,


कब शब हुई  कब आयी सहर  है। 



दौर-ए-ग़म  में  भाता  नहीं  मशवरा,


लगता ज्यों चाँदनी रात में हो बारिश,


आये हवा उनके दयार की तो लगता है,


छिपा  है  इसमें  संदेशा और सिफ़ारिश,


ज़माने   की   लाख  बंदिशें   तोड़ने,


बार-बार दिल  में उठती एक लहर है।   


© रवीन्द्र सिंह यादव 




शब्दार्थ /WORD  MEANINGS


फूल-ओ-ख़ार= फूल और काँटे / FLOWERS AND  THORNS

आरज़ू = इच्छा, ख़्वाहिश,चाहत, मनोकामना / DESIRE,WISH

रहगुज़र= राह, रास्ता, मार्ग, पथ / WAY, PATH, ROAD

रहनुमा= पथ-प्रदर्शक, राह दिखने वाला / LEADER, GUIDE

हम-सफ़र= साथी, साथ चलने वाला  / FELLOW,TRAVELER

बेताबियों= बेचैनी / RESTLESSNESS

दर-ब-दर = द्वार-द्वार भटकना / BANISHED, EXPELLED

तड़प-ओ-ख़लिश = छटपटाहट और व्यग्रता,बेचैनी,क़ोफ़्त / TORMENT AND  UNEASE

फ़लक़-ज़मीं = आसमान और धरती / SKY AND EARTH

हिय = ह्रदय, उर, दिल / HEART

हूक = ह्रदय में यकायक उठने वाली कसक या पीड़ा /
           PANG, PAINFUL EMOTION

बेक़रारी = बेचैनी, बेताबी / RESTLESSNESS, UNEASE

चश्म-ए-तर = आंसूभरी आँख (आँखें ), डबडबाई आँख / 
                       EYES  FILLED  WITH  TEARS

तसव्वुर = कल्पना, ख़याल/ ख़्याल / IMAGINATION, CONCEPTION

ठौर-ए-वस्ल = मिलन का स्थान, ठिकाना / 
                       PLACE OF  UNION,  MEETING

आब-ए-चश्म = आँखों का पानी, आंसू , अश्क़ / TEARS

बे-ख़ुदी = ख़ुद से बे-ख़बर, अपने आपको भूल जाना, आत्मविस्मित /  INTOXICATION

शब = रात, रात्रि, यामिनी, निशा  / NIGHT

सहर = सुबह  / MORNING

दौर-ए-ग़म = ग़म का दौर, दुखदाई समय / 
                     PERIOD OF SORROW

मशवरा = राय, सलाह / CONSULTATION

दयार = इलाक़ा, क्षेत्र / 
             TERRITORY, REGION

बंदिशों = रोक, प्रतिबंधों, रुकावटों / 
                STOPPAGE, CLOSURE 

मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत स्वभाव

आज एक चित्र देखा नन्हे मासूम फटेहाल भाई-बहन किसी आसन्न आशंका से डरे हुए हैं और बहन अपने भाई की गोद में उसके चीथड़े हुए वसन थामे अपना चेहरा छुपाये हुए है -


अभावों के होते हैं ख़ूबसूरत  स्वभाव, 
देखती हैं नज़रें भाई-बहन के लगाव। 

हो सुरक्षा का एहसास  तो भाई का दामन ,
ढूंढ़ोगे ममता याद आएगा माई का दामन। 

जीवन हमारा है बना  दुःखों  की चक्की, 
पिसते रहेंगे सब  चाहे हों लकी-अनलकी। 

ज़माने से हम भी  हक़  हासिल करेंगे, 
आफ़त पे जीत बे-शक  हासिल करेंगे। 

है प्रभु का शुक्राना  आज सलामत हैं हम, 
किस  लमहे  की  आख़िर ज़मानत हैं हम ?
#रवीन्द्र सिंह यादव 

शनिवार, 16 सितंबर 2017

खाता नम्बर


ग़ौर से देखो गुलशन  में 

बयाबान का साया है ,

ज़ाहिर-सी बात है 

आज फ़ज़ा ने जताया है। 




इक  दिन  मदहोश  हवाऐं 

कानों  में  कहती  गुज़र  गयीं,

 उम्मीद-ओ-ख़्वाब  का  दिया 

हमने  ही  बुझाया  है।   



आपने अपना खाता नम्बर  

विश्वास  में  किसी  को  बताया है,

तभी तो तबादला होकर दर्द 

आपके हिस्से में आया है।   



दर्द अंगड़ाई ले लेकर  

जाग उठता है  पहर-दर-पहर, 

कुछ ब्याज का हिस्सा भी 

बरबस आकर समाया है। 



आपके तबस्सुम में रहे 

वो  रंग-ओ-शोख़ियां  अब  कहाँ ?

उदास तबियत का 

दिन-ओ-दिन  भारी  हुआ  सरमाया  है। 



बिना अनुमति के खाते में 

न कुछ जोड़ा जाए,

अब जाकर राज़दार का पता 

बैंक से की इल्तिजा में बताया है।   

#रवीन्द्र सिंह यादव 

शब्दार्थ / पर्यायवाची  / WORD MEANINGS

ग़ौर से = ध्यान से, TO BE  FOCUSED 
गुलशन = फूलों का बगीचा / FLOWER GARDEN  
बयाबान =जंगल ,वीराना / WILDERNESS 
साया = छाया,शरण  / SHADOW,SHADE ,SHELTER  
फ़ज़ा= वातावरण ,परिवेश /AMBIENCE 
खाता =ACCOUNT 
ब्याज =INTEREST 
तबादला=स्थानांतर,बदली होना  / TRANSFER 
तबस्सुम =मुस्कराहट / SMILE 
शोख़ियाँ =शरारतें / MISCHIEF   
सरमाया =पूँजी ,संपत्ति / CAPITAL /WEALTH 
राज़दार = राज़/ रहस्य / गुप्त बातें  जानने वाला / FAITHFUL 
इल्तिजा  = विनती ,अनुरोध ,प्रार्थना / REQUEST 

सोमवार, 4 सितंबर 2017

छम्मकछल्लो


ठाणे की एक अदालत का सराहनीय फ़ैसला  आया है,
महिला  को "छम्मकछल्लो " कहना जुर्म ठहराया है।

शब्द ,इशारे या किसी गतिविधि से महिला का अपमान होने पर
केस दर्ज़ होता है -
भारतीय दंड संहिता की धारा 509
केस   दर्ज़  हुआ  :  09 -01 -2009
आरोप - पड़ोसी पुरुष ने "छम्मकछल्लो" कहकर पड़ोसन को अपमानित किया
फ़ैसला - आरोप सही , शब्द अपमानजनक
सज़ा - अदालत उठने तक साधारण क़ैद
जुर्माना -एक  भारतीय  रुपया
केस की अवधि - साढ़े आठ साल से अधिक 
पुलिस - केस दर्ज़ नहीं किया।


अँग्रेज़ी में न  इसका समानार्थी  मिला,
पुरुष की कुंठा का प्रमाण मिला।

 मन-मस्तिष्क पर कोई शब्द कितना असरदार होता है,
ऐसा फ़ैसला 
बे-अदब गुनाहगारों के लिए बा-असर ख़बरदार होता है। 

अपने अहम को तत्क्षण तृप्त कर कहने वाला भूल जाता है,
लक्षित-श्रोता को  कटु-शब्द  पल-पल  दिन-रात  सालता है।

भाषा की समृद्धि नए शब्दों से होती है,
शब्द -प्रहार से कभी चेतना भी रोती है।

दोस्ती-दुश्मनी याद  कराते हैं शब्द,
ब्रह्माण्ड  में   संवाद  रचाते हैं  शब्द

केस लड़ने वाली महिला के धैर्य को प्रणाम ,
सबक लें , इज़्ज़त दें ,  हों  न  यों  बदनाम।

#रवीन्द्र सिंह यादव

गुरुवार, 24 अगस्त 2017

जिओ और जीने दो

ख़ुद  जिओ 

अपने जियें,

और 

काल-कवलित 

हो जायें। 




कितना नाज़ां / स्वार्थी  

और वहशी है तू ,

तेरे रिश्ते 

रिश्ते हैं 

औरों के फ़ालतू।




चलो अब फिर 

समझदार,

नेक हो जायें,

अपनी ज़ात 

फ़ना होने तक 

क्यों  बौड़म  हो जायें....?



क़ुदरत  की 

करिश्माई कृति = इंसान 

सृजन को 

विनाश के 

मुहाने पर 

लाने वाला =इंसान। 




महक फूलों की 

दिशा कब 

तय कर पाती,

आब -ओ - हवा 

सरहदों के

नक़्शे  कभी  न  पढ़ पाती।

अंडे रखने को 

तिनके 

चुनकर 

चिड़िया चोंच  में दबाकर ,

सीमांत  इलाक़ों  में    

कुछ  इधर  से 

कुछ  उधर  से  लाती। 




बहती है नदी

ख़ुद क्या ले पाती,

रौशनी सूरज की 

जगमगाती जग को,

तब हरी पत्तियां 

भोजन बनातीं,

शुभ्र चाँदनी  में  रातें 

 ख़ूब  खुलकर खिलखिलातीं । 




ऑक्सीजन 

देते-देते  पेड़

कभी न हारे हैं ,

इंसान तेरी 

पैसे  की  हवस ने 

कितने मज़लूम मासूम मारे हैं। 



तमसभरी  राह में 

कोई लड़खड़ा गया है,

अँधेरा बहुत 

अब  तो  गहरा गया है, 

घनेरा  आलोचा गया अँधेरा,

 अब दरवाज़े पर एक दीपक जलायें ,

उकता  गया  है  मन.......  चलो 

नींद आने तक दादी से सुनें कथाऐं। 

#रवीन्द्र सिंह यादव 


शब्दों के अर्थ / Word Meanings 


और = अन्य ,दूसरे,दूसरा ,अतिरिक्त /Others ,Another, And,More 

काल-कवलित = मृत ,मर चुका ,निष्प्राण / Dead

नाज़ां = घमंड में चूर ,गर्वित /Proud ,Arrogant

वहशी =जंगली , सनकी ,Crazy ,Wild

फ़ालतू = अनावश्यक ,अतिरिक्त / Extra ,over

नेक = दयालु ,भला /Kind , One who possess noble-nature

फ़ना = नष्ट होना , विनाश होना,नष्ट-भ्रष्ट होना ,तहस-नहस होना / Destruction,Ruin 

ज़ात = जाति ,नश्ल / Caste ,Race 

बौड़म = कुंद-दिमाग़,  मंद-बुद्धि ,सुस्त -दिमाग़ / Duffer ,Stupid , Awkward 

क़ुदरत = प्रकृति , ब्रह्माण्ड,काएनात  /Nature ,Universe ,World 

करिश्माई -कृति = अदभुत रचना ,अनुपम सृजन , Wonderful Creation 

सृजन = रचना करना ,निर्माण करना / Creation 

विनाश = समाप्त होना ,नाश /नष्ट होना , Destruction 

मुहाने पर = मुख पर (जैसे नदी का मुहाना )/ At the mouth ,Outfall 

आब -ओ -हवा =जलवायु ,परिवेश ,माहौल / Climate ,Environment 

सरहदों = सीमाओं, हदों /Borders ,Limits ,Boundaries 


चोंच = मुख  का अग्र , नुकीला,कठोर  भाग  जो भोजन आदि को पकड़ने  में सहायक होता है , थूथन ,थूथनी / Beak 


सीमांत = जहां सीमा का अंत हो, सीमावर्ती /Frontier 

शुभ्र = चमकीली /Bright

हवस = अंधी चाह ,वासना, / Desire ,Greed ,Curiosity 

मज़लूम =  दबा-कुचला ,पीड़ित , जिससे ग़लत व्यवहार किया गया हो / Oppressed ,Injured ,One who is  treated in  wrong manner 

मासूम = निरपराध ,निर्दोष / Innocent 

तमसभरी राह =अँधेरे में डूबा मार्ग ,Dark Path 

लड़खड़ा गया = जिसके क़दम डगमगा गए हों , क़दम  चूकना, पाँव टेड़े -मेढ़े पड़ना /Staggered 

घनेरा  आलोचा गया = सघन रूप से जिसकी आलोचना /बुराई की गयी हो / Intense Criticism 

उकता गया है = ऊब गया है / Fad up 

मन = जी ,जियरा ,जिया ,मानस ,चित्त , 40 किलो वज़न भार की नाप (Mound ), Mind ,Psyche

चोंच = मुख  का अग्र , नुकीला,कठोर  भाग  जो भोजन आदि को पकड़ने  सहायक होता है , थूथन ,थूथनी / Beak 
  

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