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शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

अमरबेल (वर्ण पिरामिड )



मैं 
रहूँ 
सदैव 
हरी-भरी 
पैरासूट-सी 
आच्छादित होती 
मेज़बान    पेड़     पे।  



मैं 
तो हूँ 
घोषित 
परजीवी 
आतिथेय से  
हासिल पोषण 
झेलूँ  दोषारोपण।



जो 
होता 
मुझमें 
क्लोरोफिल 
स्वाभिमान से
सजती-खिलती   
जीती   अमरबेल। 

© रवीन्द्र सिंह यादव
























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