सैनिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सैनिक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 3 अगस्त 2021

जासूसी का लायसेंस लो...


निजता की गरिमा तार-तार 

साख़ रो रही है ज़ार-ज़ार

देशी जासूसी तक तो 

मनाते रहे हम ख़ैर 

विदेशियों को ठेका 

और अपनों से बैर

अब जनता की अनुमति से 

जासूसी का लायसेंस लो

जनता की गाढ़ी कमाई से 

जासूसी कंपनी का मुँह भर दो

शर्त रखो...    

पेगासस स्पाइवेयर का कैमरा क़ैद करे-

साँसों के लिए तड़पते  

सरकारी अस्पताल के पलंग पर 

एक से अधिक मरीज़ों के दृश्य

अवसर का लाभ उठाते 

संवेदनाविहीन सफ़ेदपोश लुटेरे गिरोहों के रहस्य

ऑक्सीजन के लिए साँसें गिनते मरीज़ 

जो अपने प्रियजनों से 

अंतिम साँस तक 

मोबाइल फोन पर क्या कह रहे हैं

भरा मेडीकल ऑक्सीजन सिलेंडर लेने 

कतारों में खड़े तीमारदार क्या कह रहे हैं 

श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए 

प्रतीक्षारत लाशें ही लाशें 

गंगा में बहती अधजली लाशें 

किनारे/ रेत में  दबी लाशें

कुत्ते-कौए नोंचते लाशें  

करोना महामारी में 

भूख और बेकारी से जूझते लोग 

बेकसूर जो जेलों में हैं 

उनके परिजनों को 

न्याय की दिलाशा देकर लूटते लोग

स्त्री-अस्मिता पर होते बर्बर प्रहार

क़ानून कब कहाँ कैसे होता लाचार

दंगाइयों के पोषक हैं कौन 

इंसाफ़ के सवाल पर कौन हैं मौन   

ख़ून-पसीने की कमाई 

औने-पौने दाम में लुटाते किसान 

हज़ारों किलोमीटर पैदल चलते 

मज़दूरों के छालों के निशान 

हताश युवाओं के बिखरते अरमान 

सीमा पर जान करते सैनिक क़ुर्बान 

पेगासस स्पाइवेयर के वीडियो / ऑडियो में 

ये सब देश देखना चाहेगा

सत्ता जनहित में समर्पित हो 

तो उसे कौन हिलाना चाहेगा?

© रवीन्द्र सिंह यादव 

  

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

करगिल विजय दिवस

वह 1999 का वर्ष था,

दोस्ताना अंदाज़ और अपार हर्ष था।  


जब अटल जी पहुँचे थे

दिल्ली से बस द्वारा लाहौर, 

दोस्ती की ख़ुशबू से 

महके थे दोनों देशों के ठौर। 


जब पींगें बढ़ी मित्रता की 

था फरवरी महीना,

पाकिस्तानी सेना को रास न आया 

दो मुल्कों का अमन से जीना। 


उधर धीरे-धीरे रच डाला  

साज़िश मक्कारी का खेल, 

साबित किया पाकिस्तान ने 

मुमकिन नहीं केर-बेर का मेल। 


अन्तरराष्ट्रीय समझौते की आत्मा रौंद 

घुसी पाकिस्तानी सेना चोरी से करगिल में, 

षडयंत्र का भंडाफोड़ हुआ तो 

टीस चुभी प्रबुद्ध मानवता के दिल में। 


3 मई से 26 जुलाई, 

चली हौसलों और बलिदान की भीषण लड़ाई। 

थल सेना ने जाँबाज़  गंवाकर सरज़मीं बचाई,  

दुश्मन से करगिल पहाड़ी ख़ाली करवायी। 


सर पर कफ़न बाँधकर

रण में कूदे थे भारत माँ के लाल,

दुश्मन को धूल चटाकर 

किया गर्वोन्नत हर भारतवासी का भाल। 


शत्रु  बैठा था रणनीति बनाकर, 

पर्याप्त ऊँचाई पर बंकर बनाकर। 

भारत माँ ने 527 प्यारे सपूत गँवाये, 

लिपटे हुए तिरंगे में सरहद से घर आये। 


सरहद की माटी में मिल गये 

प्रतीक्षा के सारे सिंदूरी सपने,

राखी, कंगन, तिलक रह गये 

बसकर बेबस यादों में अपने।  
  

क़ुर्बानी की ज्योति बनकर 

सीमा पर जो उजियारा है,

डटे रहो हे सैनिक दमभर 

शत-शत  नमन हमारा है।        

©रवीन्द्र सिंह यादव 




शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

कन्धों पर सरहद के जाँबाज़ प्रहरी आ गये

मातम का माहौल है 

कन्धों पर सरहद के

जाँबाज़ प्रहरी आ गये 

देश में शब्दाडम्बर के 

उन्मादी बादल छा गये 

रणबाँकुरों का रक्त 

सड़कों पर बहा 

भारत ने आतंक का 

ख़ूनी ज़ख़्म सहा 

बदला! बदला!!

आज पुकारे देश हमारा

गूँज रहा है 

गली-चौराहे पर 

बस यही नारा 
 
बदला हम लेंगे 

फिर वे लेंगे....  

बदला हम लेंगे 

फिर वे लेंगे....

हम.... 

फिर वे......

केंडिल मार्च में 

भारी आक्रोशित मन होगा 
   
मातम इधर होगा

मातम उधर भी होगा

हासिल क्या होगा 

यह अंतहीन सिलसिला 

ख़त्म हो 

समाधान हो

विवेक जाग्रत हो 

सेना सक्षम हो

निर्णय क्षमता विकसित हो

स्टूडियो में एंकर लड़ते युद्ध

रैलियों में नेता भीड़ करते क्रुद्ध

लाल बहादुर शास्त्री से सीखो 

निर्णय लेना

जय जवान 

जय किसान 

तब इतराकर कहना

भय से मिलता वोट 

जिन्हें वे अब जानें  

मत समझो सस्ती हैं 

धरती के लालों की जानें !

दुश्मन को सक्षम सेना सबक़ सिखायेगी, 

बकरे की अम्मा कब तक ख़ैर मनायेगी। 

© रवीन्द्र सिंह यादव     

बुधवार, 11 जनवरी 2017

सैनिक की जली हुई रोटियाँ



सैनिक  ने

अंतर्जाल  पर   वीडियो  अपलोड  कर,

दिखाई  जली  हुईं   रोटियाँ,

सीमा  सुरक्षा  बल  ने  जाँच  कर  खंडन  किया।



सैनिक!

आप   नहीं  जानते,

आपकी   दिखाई

 अधजली   रोटी  ग्लोबल  ट्रेंड  बन  गयी।



हमने  तो  सिर्फ़

अपना  मन  मसोस  लिया,

ख़ुद  को  तिलमिला  लिया,

राष्ट्रीय-सुरक्षा   के  गंभीर  सवालों  से,

ख़ुद   को  खदबदा  लिया।


लेकिन........

जो-

 हमारी  राष्ट्रीय  एकता  और  अखंडता  के  लिए  ख़तरे   हैं,

उनकी   बाँछें     तो   खिल  गयी  होगीं,

अधजली   रोटी  खाने  वाली  सेना  को

दुश्मन   क्या  समझेगा ..?




सैनिक!

हमारी  चैन  की  नींद  न  उड़ाओ,

जो  मिले  वही  खाओ,

स्वदेश   के  लिए  क्या  कुछ  नहीं  सहना  पड़ता  है,

श्रम, लहू   के    साथ   यौवन    भी  वारना  पड़ता   है।



शिकायत-

 ईर्ष्या ,आक्रोश, बदलाभाव 

और  खलबली  पैदा  करती   है,

दुश्मन   को  रणनीति   का  इशारा   करती   है,

सब्र  रखो......

विमूढ़ता   और  विवेक   में  फ़र्क   रखो।




सर-ज़मीं   क़ुर्बानी    माँगती    है,

सैनिक   के   ख़ून    में  रवानी   माँगती  है,

दूसरों   का  हक़   मारने   वाले   बेनक़ाब   होंगे!

हम  बुलंद  हौसलों   के  साथ    क़ामयाब    होंगे!!

जय  हिन्द!!!

@रवीन्द्र सिंह यादव



विशिष्ट पोस्ट

जलप्रलय

जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...