स्टोमेटा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
स्टोमेटा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 16 जून 2024

तपिश और पेड़

चित्र: महेन्द्र सिंह 


 गमलों में पेड़ लगाकर 

आत्ममुग्ध होता समाज 

व्यथित है 

सूरज की प्रचंड तपिश से

हाँ, बदलेगा वातावरण 

बड़ी होती इस कोशिश से 


पेड़ की जड़ 

खींचती जल भूतल से 

पहुँचाती आँतरिक वाहिनियों के ज़रिये 

पत्ती के स्टोमेटा तक 

वाष्पोत्सर्जन वातावरण को देता ठंडक

छाया में आती राहत की ठसक

 

जो सूख गया या काटा गया पेड़ 

तो देखा गया जलते हुए 

सर्दी के अलाव में 

या घर की शोभा बनते हुए 


पेड़ तो स्वयं उगते हैं 

सजते-सँवरते हैं वन-उपवन होकर 

कुदृष्टि आदमी की उजाड़ती है वृक्ष 

अति भौतिकता का दास होकर

उजड़ते वन बसती बस्तियाँ 

बढ़ता वातावरण का तापमान 

जीवन के लिए ख़तरा


वृक्षों को जबरन मुक्ति देता आदमी 

कभी झाँक लेगा अपने भीतर 

रोते-सिसकते मिलेंगे 

चिड़िया,कोयल,मोर,बटेर,तीतर। 

 ©रवीन्द्र सिंह यादव

  


सोमवार, 20 नवंबर 2023

झाड़ी और शिशु

झाड़ी हाँफ रही थी 

उस रात 

जब 

ख़ुशी मनाने की सनक

ऐसी कि धमाके की क्रूर ध्वनि  

दूर-दूर तक पहुँचे

ख़ुशी दीवाली की हो 

या मैच जीतने की 

बारूद का धुँआँ 

झाड़ी की पत्तियों के 

स्टोमेटा का

मुख अवरुद्द करता 

कुछ दिन उपरांत 

झाड़ी सूख जाती है 

बारूदी धुँएँ के महीन कण 

मासूम बच्चों के फेफड़ों में 

जबरन धँस जाते हैं 

उनकी तड़प बढ़ा देते हैं

श्वास-प्रश्वास का विधान 

विकृत कर देते हैं 

जिसे सुनकर  

समझदार लोग

एयर प्यूरीफायर लगे घर से 

मुख पर मास्क लगाकर   

बस इतना ही कहते हैं- 

बच्चा भूखा होगा...     

©रवीन्द्र सिंह यादव

विशिष्ट पोस्ट

जलप्रलय

जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...