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शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

यह जो बरसात आई है

यह जो बरसात 

आई है

हर बार की तरह 

फिर इस बार

सुहानी तो बिल्कुल नहीं

कोढ़ में खुजली-सी

लग रही है इस बार

अभी बाढ़ से आई तबाही

है चर्चा में

कल सूखे की चर्चा होगी

अभी मरनेवालों की चर्चा है

कल 

फ़सल-भूखे की चर्चा होगी

करोना महामारी से 

जूझ रही दुनिया में

अब मौतों के आँकड़े

दबाए जा रहे हैं

वैक्सीन बनने के 

समाचार

कमाऊ मंशा से 

फैलाए जा रहे हैं

पीड़ित मानवता का 

दम घुट रहा है

कोई दोनों हाथों से 

दौलत समेट रहा है

कोई सरेआम लुट रहा है

सरकार-समाज

ज्ञान-विज्ञान

धर्म-ज्योतिष

तर्क-पाखंड 

न्याय-मज़लूम 

सामाजिक मूल्य-अवसरवादी मूल्यविहीन अमूल्य 

सभी वक़्त की कसौटी पर

अपनी-अपनी परीक्षा दे रहे हैं

फ़िलहाल

पावस ऋतु में  

साफ़ हवा में

आशंकित 

हम 

सांस ले रहे हैं।    

© रवीन्द्र सिंह यादव
   

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