दादी दबी आकांक्षाएँ लिए
पेशानी पर तेवर लिए
बेकसी का दौर
चेहरे पर लिए
बूढ़ी आँखों में
प्रश्न-ख़ंजर लिए
पूछती पोती से
पैंतीसवें दिन
लॉक डाउन
कब ख़त्म होगा?
अपने गाँव जाना है
अपनों के बीच मरना है
बची सांसें ओसारे में पूरी करनी हैं
शहरी घुटन में क्या उम्र पूरी करनी है?
अजीब शहर है
न धूप खुली
न हवा खुली
न खुला मन
मोबाइल में व्यस्त
अबाल-वृद्धजन
दिखती ज़िंदा हूँ
मरी-सी हूँ!
समझी...!
©रवीन्द्र सिंह यादव
पेशानी पर तेवर लिए
बेकसी का दौर
चेहरे पर लिए
बूढ़ी आँखों में
प्रश्न-ख़ंजर लिए
पूछती पोती से
पैंतीसवें दिन
लॉक डाउन
कब ख़त्म होगा?
अपने गाँव जाना है
अपनों के बीच मरना है
बची सांसें ओसारे में पूरी करनी हैं
शहरी घुटन में क्या उम्र पूरी करनी है?
अजीब शहर है
न धूप खुली
न हवा खुली
न खुला मन
मोबाइल में व्यस्त
अबाल-वृद्धजन
दिखती ज़िंदा हूँ
मरी-सी हूँ!
समझी...!
©रवीन्द्र सिंह यादव