वह 1999 का वर्ष था,
दोस्ताना अंदाज़ और अपार हर्ष था।
जब अटल जी पहुँचे थे
दिल्ली से बस द्वारा लाहौर,
दोस्ती की ख़ुशबू से
महके थे दोनों देशों के ठौर।
जब पींगें बढ़ी मित्रता की
था फरवरी महीना,
पाकिस्तानी सेना को रास न आया
दो मुल्कों का अमन से जीना।
उधर धीरे-धीरे रच डाला
साज़िश मक्कारी का खेल,
साबित किया पाकिस्तान ने
मुमकिन नहीं केर-बेर का मेल।
अन्तरराष्ट्रीय समझौते की आत्मा रौंद
घुसी पाकिस्तानी सेना चोरी से करगिल में,
षडयंत्र का भंडाफोड़ हुआ तो
टीस चुभी प्रबुद्ध मानवता के दिल में।
3 मई से 26 जुलाई,
चली हौसलों और बलिदान की भीषण लड़ाई।
थल सेना ने जाँबाज़ गंवाकर सरज़मीं बचाई,
दुश्मन से करगिल पहाड़ी ख़ाली करवायी।
सर पर कफ़न बाँधकर
रण में कूदे थे भारत माँ के लाल,
दुश्मन को धूल चटाकर
किया गर्वोन्नत हर भारतवासी का भाल।
शत्रु बैठा था रणनीति बनाकर,
पर्याप्त ऊँचाई पर बंकर बनाकर।
भारत माँ ने 527 प्यारे सपूत गँवाये,
लिपटे हुए तिरंगे में सरहद से घर आये।
सरहद की माटी में मिल गये
प्रतीक्षा के सारे सिंदूरी सपने,
राखी, कंगन, तिलक रह गये
बसकर बेबस यादों में अपने।
क़ुर्बानी की ज्योति बनकर
सीमा पर जो उजियारा है,
डटे रहो हे सैनिक दमभर
शत-शत नमन हमारा है।
©रवीन्द्र सिंह यादव
दोस्ताना अंदाज़ और अपार हर्ष था।
जब अटल जी पहुँचे थे
दिल्ली से बस द्वारा लाहौर,
दोस्ती की ख़ुशबू से
महके थे दोनों देशों के ठौर।
जब पींगें बढ़ी मित्रता की
था फरवरी महीना,
पाकिस्तानी सेना को रास न आया
दो मुल्कों का अमन से जीना।
उधर धीरे-धीरे रच डाला
साज़िश मक्कारी का खेल,
साबित किया पाकिस्तान ने
मुमकिन नहीं केर-बेर का मेल।
अन्तरराष्ट्रीय समझौते की आत्मा रौंद
घुसी पाकिस्तानी सेना चोरी से करगिल में,
षडयंत्र का भंडाफोड़ हुआ तो
टीस चुभी प्रबुद्ध मानवता के दिल में।
3 मई से 26 जुलाई,
चली हौसलों और बलिदान की भीषण लड़ाई।
थल सेना ने जाँबाज़ गंवाकर सरज़मीं बचाई,
दुश्मन से करगिल पहाड़ी ख़ाली करवायी।
सर पर कफ़न बाँधकर
रण में कूदे थे भारत माँ के लाल,
दुश्मन को धूल चटाकर
किया गर्वोन्नत हर भारतवासी का भाल।
शत्रु बैठा था रणनीति बनाकर,
पर्याप्त ऊँचाई पर बंकर बनाकर।
भारत माँ ने 527 प्यारे सपूत गँवाये,
लिपटे हुए तिरंगे में सरहद से घर आये।
सरहद की माटी में मिल गये
प्रतीक्षा के सारे सिंदूरी सपने,
राखी, कंगन, तिलक रह गये
बसकर बेबस यादों में अपने।
क़ुर्बानी की ज्योति बनकर
सीमा पर जो उजियारा है,
डटे रहो हे सैनिक दमभर
शत-शत नमन हमारा है।
©रवीन्द्र सिंह यादव