उस रोज़
सैर से लौटते हुए
मित्र मुझे एक घर में
अकारण ही ले गया
कोई काग़ज़ी लेनदेन था
चाय-पानी के बाद
हम अपने रास्ते पर आए।
मैंने मित्र को छेड़ते हुए कहा-
"जोड़ा बेमेल था।"
"पहली
इसके कुकर्मों के चलते
आत्मदाह कर चल बसी
दूसरी के हाथ
पहली की हत्या की
चिट्ठी हाथ लग गई
अब तलाक़ का
केस चल रहा है
कइयों का घर
झगड़े में पल रहा है
यह जो तीसरी है
दूसरी को
तलाक़ की डिग्री
मिलने पर
विधिवत पत्नी हो जाएगी।"
मित्र की
पहेलीनुमा बातें सुनकर
मेरा सर
चकरा गया
चलते-चलते
लैम्प-पोस्ट से
टकरा गया
सोचने लगा-
हत्यारे-
कलाप्रेमी
कलापारखी
संगीतप्रेमी
प्रकृतिप्रेमी
पर्यावरणप्रेमी
पक्षीप्रेमी
समाजसेवी
चेहरे पर
शालीन मुस्कान लिए होते हैं!
उस घर में दिखी
एक-एक वस्तु
मेरे ज़ेहन में
ज़ोर-ज़ोर से
हथौड़े-से
निर्मम प्रहार करती हुई
पूछ रही थी-
क्यों आए थे
एक हत्यारे के साथी के साथ
हत्यारे के घर में?
© रवीन्द्र सिंह यादव
सैर से लौटते हुए
मित्र मुझे एक घर में
अकारण ही ले गया
कोई काग़ज़ी लेनदेन था
चाय-पानी के बाद
हम अपने रास्ते पर आए।
मैंने मित्र को छेड़ते हुए कहा-
"जोड़ा बेमेल था।"
"पहली
इसके कुकर्मों के चलते
आत्मदाह कर चल बसी
दूसरी के हाथ
पहली की हत्या की
चिट्ठी हाथ लग गई
अब तलाक़ का
केस चल रहा है
कइयों का घर
झगड़े में पल रहा है
यह जो तीसरी है
दूसरी को
तलाक़ की डिग्री
मिलने पर
विधिवत पत्नी हो जाएगी।"
मित्र की
पहेलीनुमा बातें सुनकर
मेरा सर
चकरा गया
चलते-चलते
लैम्प-पोस्ट से
टकरा गया
सोचने लगा-
हत्यारे-
कलाप्रेमी
कलापारखी
संगीतप्रेमी
प्रकृतिप्रेमी
पर्यावरणप्रेमी
पक्षीप्रेमी
समाजसेवी
चेहरे पर
शालीन मुस्कान लिए होते हैं!
उस घर में दिखी
एक-एक वस्तु
मेरे ज़ेहन में
ज़ोर-ज़ोर से
हथौड़े-से
निर्मम प्रहार करती हुई
पूछ रही थी-
क्यों आए थे
एक हत्यारे के साथी के साथ
हत्यारे के घर में?
© रवीन्द्र सिंह यादव






