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सोमवार, 22 जून 2026

सीढ़ी जो उदास थी...


                             चित्र साभार : गूगल 

बुज़ुर्ग सीढ़ी क्या कहे अपनी दास्तान 

रोती है ज़ार-ज़ार हो जब सूना मकान

बेफ़िक्र उत्सुक हो चढ़ जाते हैं सीढ़ी 

भूतल को सँभलकर उतरते हैं सीढ़ी 


ममता, प्रेम, घृणा, आकांक्षा 

सब चढ़े-उतरे हैं सीढ़ी से 

निर्माता के उर में उतर गयी है 

भव्य नियोजित सीढ़ी-दर-सीढ़ी 


इस सीढ़ी का वैभवपूर्ण इतिहास 

लिखेगा कोई धीर शोधार्थी 

आधुनिकता के अंधड़ में सूनी हुई तो क्या 

सीढ़ी संग जीने वाले थे रसिक संगी-साथी.

©रवीन्द्र सिंह यादव

#सीढ़ी 

#stairs 

#past 

#history 

#life

#poetrywriting

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2023

निरपराध

गुनगुनी अलसाई धूप में  

चील की कर्कश चीत्कार

सुन रहे हैं मासूम कान

विष वमन करते सर्पों को देख 

घर होता जा रहा है मकान  

कोमल मन पर घृणा के घाव देने 

खुल रही है दुकान-दर-दुकान

कैसे जीएगा नन्हा मेमना जीभर 

घेरे खड़ा है भेड़िया, चेहरे पर लिए कुटिल मुस्कान? 

© रवीन्द्र सिंह यादव   


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