1.
जनता कहती
सता रही है
महँगाई की मार,
नेताओं को
पहनाओ अब
सूखे पत्तों के हार।
लेने वोट हमारा
नेता
झुकते बारम्बार,
जीत गये तो
इनका सजता
सुरक्षित शाही दरबार।
2.
इबादत-गाहों में
रहते कैसे-कैसे
परमेश्वर के
सेवादार,
शराफ़त का हैं
ओढ़े लबादा
पतित अधर्मी
धर्म के ठेकेदार।
© रवीन्द्र सिंह यादव