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बुधवार, 1 नवंबर 2017

100 के आगे 100 के पीछे

आइये कुछ आँकड़ों पर विचार करें, 

आपस में आज बातें दो-चार करें।  

विश्व  बैंक  की  रिपोर्ट  आई  है, 

सरकार के लिए ख़ुशियाँ लाई है, 

"ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस" में भारत को, 

100 वां स्थान मिल गया है,

हमारा तो दिमाग़ हिल गया है।  


ज़ीरो की ओर बढ़ने वाला देश, 

श्रेष्ठता की ओर बढ़ता है, 

व्यापार में कठिनाइयों का दौर घटता है, 

2016 में 130 वां स्थान था, 

2015 में 131 वां स्थान था। 


अब देखते हैं दूसरा दृश्य,

समझिए  इसका भी रहस्य- 

इंटरनेशनल  फ़ूड पॉलिसी रिसर्च ने, 

"ग्लोबल हंगर इंडेक्स" ज़ारी किया है, 

हमारे  मन   पर  बोझ  भारी  किया है, 

भारत  को  100 वां  स्थान  मिला  है, 

भुखमरी की न किसी से कोई गिला है, 

ज़ीरो की ओर बढ़ने वाला देश, 

भुखमरी पर जीत  की  ओर  बढ़ता  है, 

जीवन में दुश्वारियों का दौर  घटता  है, 

2016 में 97 वां स्थान था, 

हालात सुधरने का गुमान था। 


व्यापार में  सुगम सुविधा-सुधार के लिए, 

30 अंकों की बेशर्म सकारात्मक वृद्धि!

भूख और कुपोषण  से  लड़ने की  हमारी  संवेदना  में 

3 अंकों  की नकारात्मक वृद्धि!! 

एक और सर्वे आया है- 

50 प्रतिशत लोगों ने रिश्वत देकर सरकारी कार्य करवाया है। 

कैसा राष्ट्रीय चरित्र विकसित हो रहा है...?

हमारा मानस कहाँ  सो  रहा है ...?

ज़रा सोचिए...!

ठंडे दिमाग़ से,

क्या मिलेगा?

भावी पीढ़ियों को, 

कोरे सब्ज़बाग़ से...!   

#रवीन्द्र सिंह यादव 

शनिवार, 21 अक्टूबर 2017

भूख से मौत

संतोषी भात-भात कहते-कहते भूख से मर गयी,
हमारी शर्म-ओ-हया भी तो अब बेमौत मर गयी।

डिप्टी कमिश्नर ने जांच के बाद कहा -
वह तो मलेरिया से मर गयी,
हम पूछते हैं -
सरकार की ग़ैरत  कैसे  मर गयी?
मलेरिया के मरीज़ को भी भूख लगती है 
मलेरिया से मरना मच्छर के माथे कलंक ?
कैसा मशीनी / डिजिटल समाज बना रहे हैं हम ?  
भूख से मरना ही नहीं है सरकार के माथे कलंक!

भुखमरी में भारत को नया स्थान मिला है ,
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में
119 देशों में  100 वां  स्थान मिला है,
गत  वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष 
3 अंकों का नकारात्मक बोनस मिला है। 
क्या हमें संतोष होना चाहिए ?
कि हमसे भी  बुरा स्थान 19 और देशों को मिला है!

सरकार की ज़िद है -
अब आधार को राशन कार्ड से लिंक कराना ज़रूरी है,
सुप्रीम कोर्ट में आधार पर सुनवाई अभी अधूरी है। 
ग़रीब जनता असमंजस में है कि
सरकार की सुने या सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करे ?
खाद्य सुरक्षा क़ानून है फिर भी भूख से तड़प-तड़पकर मरे ?
ग़रीब के मरने पर ही जागती है सरकार,
अमीर के तो इशारों पर भागती है सरकार।

#रवीन्द्र सिंह यादव

डिप्टी कमिश्नर = ज़िला सिमडेगा (झारखंड) 

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