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मंगलवार, 13 अगस्त 2019

कश्मीरी लड़की



हाँ मैं कश्मीरी लड़की हूँ! 

अपने देशवासियों पर भड़की हूँ। 

मेरा रंग और बदन पसंद तुम्हें, 

ये मनोविकार हैं नापसंद मुझे,

गुल बनो!

गुलफ़ाम को लेने,

आ जाना गुलशन में!

बदल सकोगे जलवायु अपने इलाक़े की?

जिसमें पलकर मैं बड़ी हुई  

सुमन पाँख-सी कोमल हूँ 

स्त्री का सम्मान करो बदलो सोच सड़ी हुई।   

ईद मुबारक उन्हें भी 

जो मेरे रंगरूप पर मोहित हैं

ज़ेहन में सिर्फ़ भोग्या का भाव रखते हैं!

© रवीन्द्र सिंह यादव 

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