जनता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जनता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 28 अप्रैल 2018

न्याय-तंत्र ही माँगे न्याय...

लोकतंत्र का एक खम्भा 
कहलाती न्याय-व्यवस्था, 
न्याय-तंत्र ही माँगे न्याय
    आयी कैसी जटिल अवस्था।    
इंसाफ़ के लिए 
वर्षों से 
लाचार 
जनता तड़पती देखो,  
वर्चस्व के लिए 
अब आपस में  
न्याय-व्यवस्था 
झगड़ती देखो।
सत्ता और 
न्याय-व्यवस्था में 
दोस्ती और 
साँठगाँठ का अनुमान,
गुज़रेगा यह 
दुश्वारियों का दौर भी  
फ़ैसले करेंगे दूर 
फ़ुतूर और गुमान।

#रवीन्द्र सिंह यादव 


बुधवार, 15 नवंबर 2017

धूर्त फ़िल्मकार

धूर्त फ़िल्मकार  
संवेदनशील बिषयों पर 
फ़िल्म बनाते हैं 
जनता की जेब से 
पैसा निकालते हैं 
भोली-भाली जनता को 
ठगने के लिए 
किराये के गुंडों 
सरकारी तंत्र 
और मीडिया का 
चालाकी से 
इस्तेमाल करते हैं 
फ्री पब्लिसिटी पाने का
सुलभ तरीका 
इनका हर बार सफल होता है 
जनता के बीच पनपता 
असंतोष,असमंजस और भावनात्मक ज्वार 
इनकी तिजोरियां भरता है 
इसलिए फ़िल्म रिलीज़ से पूर्व  
गोलमोल बात साक्षात्कार में करता है 
साफ़ क्यों नहीं कहते कि 
लोग जिस मुद्दे पर आंदोलित हैं 
उसकी हक़ीक़त क्या है...? 
हम समझते हैं 
इसके पीछे 
तुम्हारी बदनीयत क्या है...? 
भ्रम को और हवा देकर 
रिकॉर्ड तोड़ सफलता का सपना देखते हैं 
विवादास्पद फ़िल्म देखकर लौटे दर्शक
अपने हाथ बार-बार मलते  हैं।  
#रवीन्द्र सिंह यादव 

विशिष्ट पोस्ट

जलप्रलय

जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...