क़दम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
क़दम लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 6 मई 2021

दूर... दूर... 6 फ़ीट दूर!

 

दूर... दूर... 

6 फ़ीट दूर!

करोना ने फैलाया है 

क़दम-दर-क़दम 

फ़ितूर ही फ़ितूर 

वक़्त के क़हर में

हम हुए कितने मजबूर

हँसमुख बच्चे भी 

हुए गुमसुम 

बुज़ुर्गों की ख़ैरियत 

हुई कम-से-कम 

ऑक्सीजन देनेवालों का 

बढ़ा है गुरूर!

करोना के आगे 

खड़ा हूँ सेवा में हुज़ूर!  

© रवीन्द्र सिंह यादव  

शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

ख़िज़ाँ ने फिर अपना रुख़ क्यों मोड़ा है?




मिटकर मेहंदी को

रचते सबने देखा है,

उजड़कर मोहब्बत को

रंग लाते देखा है?


चमन में बहारों का

बस वक़्त थोड़ा है,

ख़िज़ाँ ने फिर अपना

रुख़ क्यों मोड़ा है?


ज़माने के सितम से

न छूटता दामन है,

जुदाई से बड़ा

भला कोई इम्तिहान है?


मज़बूरी के दायरों में

हसरतें दिन-रात पलीं,

मचलती उम्मीदें

कब क़दम मिलाकर चलीं? 


दुनिया में वफ़ा की आबरू है

साथ ख़ौफ़-ए-जफ़ा है,

ज़मीं-आसमां किसी बेआसरा से

क्यों इतना ख़फ़ा हैं?

© रवीन्द्र सिंह यादव

विशिष्ट पोस्ट

जलप्रलय

जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...