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गुरुवार, 1 नवंबर 2018

माँ (वर्ण पिरामिड)


माँ  
सृष्टि 
स्पंदन  
अनुभूति 
सप्त-स्वर में 
गूँजता संगीत 
वट वृक्ष की छाँव।  


माँ 
आँसू 
ममता 
संवेदना  
गोद में लोक 
जीवन आलोक
निर्झर-सा प्रवाह। 


माँ 
शब्द 
क़लम 
रचना है 
कैनवास है 
सनी है रंग में  
कूची चित्रकार की। 


माँ 
बीज 
फ़सल 
खलिहान 
रोपती गुण 
काटे अवगुण 
संयम का भंडार। 


माँ 
थामे 
अँगुली 
देती ज्ञान 
मिथ्या संसार 
चरित्र-निर्माण 
संस्कारवान पथ। 


माँ 
फूल 
महक
बग़िया में 
मोहक कूक   
पालती उसूल 
दे थपकी गा लोरी।


माँ 
राग 
प्रकृति
अरुणिमा 
भावों का गाँव
प्यारी धूप-छाँव
गौरव जीवन का।       

© रवीन्द्र सिंह यादव


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