ये कहाँ से
आ गयी बहार है ,
बंद तो
मेरी गली का द्वार है। ....(1)
ख़्वाहिशें टकरा के
चूर हो गयीं,
हसरतों का दर्द
अभी उधार है।
बंद तो
मेरी गली का द्वार है।....(2)
नफ़रतों के तीर
छलनी कर गए जिगर ,
वक़्त लाएगा मरहम
जिसका इंतज़ार है।
बंद तो
मेरी गली का द्वार है।.....(3)
बदल गए हैं
इश्क़ के अंदाज़ अब,
उल्फ़तों का
सज गया बाज़ार है।
बंद तो
मेरी गली का द्वार है।....(4)
अरमान बिखर जाएँ तो
संभाल लेना दिल,
छीनता है एक
वो देता हज़ार है।
बंद तो
मेरी गली का द्वार है।.....(5)
टूटते हैं रोज़-रोज़
तारे आसमान में ,
"रवीन्द्र " को तो
ज़िन्दगी से प्यार है।
बंद तो
मेरी गली का द्वार है।...(6)
@रवीन्द्र सिंह यादव
इस रचना का यू ट्यूब विडियो लिंक- https://youtu.be/6n-Og0O8cTE