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रविवार, 22 सितंबर 2019

यह कैसा जश्न है ?



अंगारे आँगन में 

सुलग-दहक रहे हैं, 

पानी लेने परदेश 

जाने की नौबत क्यों ?

न्यायपूर्ण सर्वग्राही 

राम राज्य में 

नारी को इंसाफ़ के लिये 

दर-ब-दर भटकना क्यों?

बाढ़ में सब बह गया 

फ़सलें हुईं तबाह 

विदेशों में जलसों की 

बेहूदा ख़बरें क्यों ?

मीडिया की वाहियात ज़्यादतियाँ 

अब असहनीय हैं 

सिर्फ़ अदालतों के दख्ल पर 

केस होते दर्ज़ क्यों ?

© रवीन्द्र सिंह यादव

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जलप्रलय

जल जीवन है  और मृत्यु भी  बहार है  तो विभीषिका भी जल किलकारी है  और चीख़ भी  इंसानी दंभ को  तोड़ती सीख भी नींव, कंगूरा,  दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे...