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गुरुवार, 27 अगस्त 2026

जलप्रलय

जल जीवन है 
और मृत्यु भी 
बहार है 
तो विभीषिका भी

जल किलकारी है 
और चीख़ भी 
इंसानी दंभ को 
तोड़ती सीख भी

नींव, कंगूरा, 
दरवाज़े,खिड़कियाँ,झरोखे 
बह गये सब सपने 
उम्मीदें और भरोसे 

तोड़ता सीमाएँ 
सृष्टि का विकराल रूप  
आँचल माटी का 
धरता कैसे-कैसे रूप 

अल्ट्रा मॉडर्न तकनीक 
दृश्य क़ैद करती रही 
जलप्लावन की विकरालता में 
चीख़-पुकार दबती रही 

पुनः सजेंगे सँवरेंगे 
जिजीविषा के क्षितिज 
रोपे जाते रहेंगे  
इंद्रधनुषी आशाओं भरे बीज।    
©रवीन्द्र सिंह यादव

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