हमारे हिस्से में
जो लिखा था
सफ़हा-सफ़हा से
वे हर्फ़-हर्फ़ सारे
दीमक चाट गयी
डगमगाया है
काग़ज़ से
विश्वास हमारा
पत्थर पर लिखेंगे
इबारत नई
सिकुड़ती जा रही
सब्र की गुँजाइश
बिखरने के
अनचाहे सिलसिले हैं
इंसाफ़ की आवाज़
कहाँ गुम है ?
किसने आज़ाद हवा के
लब सिले हैं?
© रवीन्द्र सिंह यादव
शब्दार्थ / WORD MEANINGS
सफ़हा = पृष्ठ,पन्ना / PAGE
हर्फ़ = शब्द / WORD
लब = होंठ / LIP(S)
लब = होंठ / LIP(S)