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ऑक्सीजन और दीया

उमसभरी दोपहरी गुज़री  शाम ढलते-ढलते  हवा की तासीर बदली  ज्यों आसपास बरसी हो बदली ध्यान पर बैठने का नियत समय  बिजली गुल हुई आज असमय  मिट्टी का...