शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

वे कौन हैं ?

 

वे 

जहाँ भी रहते हैं 

रचते हैं शोषण का चक्रव्यूह 

वे 

अक्षम हैं अकेले लड़ने में 

चुनते हैं अपना समूह

वे 

न्यायप्रिय क़तई नहीं हैं  

प्राकृतिक-न्याय के सिद्धांत पर काँपती है उनकी रूह!

वे 

कौन हैं 

जो दूसरों का हक़ मारते हैं 

उन्हें सब जानते हैं! 

©रवीन्द्र सिंह यादव   

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